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टच टाइपिंग

टच टाइपिंग, टाइपिंग करने की वह तकनीक है जिसमें लोग की-बोर्ड को देखे बिना टाइपिंग करते हैं। टाइपिस्ट अपनी मांसपेशियों की याददाश्त के आधार पर यह जान लेते हैं कि उनका हाथ की-बोर्ड पर सही जगह पर है या नहीं। टाइपिंग की इस विधि का उपयोग अधिकांशत: प्रोफेशनल टाइपिस्ट करते हैं।

टच टाइपिंग कोई नई तकनीक नहीं है, इसकी शुरुआत 18वीं सदी के आसपास ही हो चुकी थी। इसके लिए कई तरह के की-बोर्ड लेआउट का इस्तेमाल होता है, पर इनमें सबसे लोकप्रिय क्वर्टी और ड्वोरक (Dvorak) की-बोर्ड हैं। टच टाइपिंग में टाइपिस्ट अपने हाथों को की-बोर्ड के बीच में ‘होम की वाली लाइन पर’ रखते हैं ताकि की-बोर्ड के किसी भी अक्षर तक अंगुलियों को पहुंचने में परेशानी न हो।

लोग अमूमन की-बोर्ड लेआउट देखकर और काफी प्रैक्टिस करने के बाद टच टाइपिंग सीखते हैं। वो अपनी इस कला में पूरी तरह से परफेक्ट हो जाएं, इसलिए कई टाइपिस्ट की-बोर्ड और अपनी अंगुलियों को किसी कपड़े से ढक कर प्रैक्टिस करते हैं।

टच टाइपिंग को लोग अकसर काफी जल्दी सीख लेते हैं। वैसे देखा जाए तो यह ‘हंट एंड पेक’ तकनीक के बिल्कुल उलट है। ‘हंट एंड पेक’ तकनीक में टाइपिंग करने वाला व्यक्ति की-बोर्ड में अपनी जरूरत के बटन को पहले ढूंढ़ता है और फिर उसे टाइप करता है। इस तकनीक से टाइपिंग सीखने में अपेक्षाकृत ज्यादा वक्त लगता है और इस टाइपिंग में अंगुलियों पर ज्यादा बल भी पड़ता है।

आप यह टाइपिंग ऑनलाइन या सॉफ्टवेयर की मदद से भी सीख सकते हैं। इस टाइपिंग को जल्दी सीखने के लिए ऑनलाइन कई टिप्स भी मौजूद हैं। इस टाइपिंग को सीख पाना तभी संभव है जब आप नियमित रूप से टाइपिंग का अभ्यास करें ताकि आपकी मांसपेशियों को टाइपिंग की आदत पड़ जाए। कई लोग प्रति मिनट 200 शब्द तक टाइप कर लेते हैं। यह इस पर निर्भर करता है कि आप कितनी टाइपिंग करते हैं, कौन-से की बोर्ड पर और आसपास का माहौल कैसा है।

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  • Web Title:टच टाइपिंग