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केवीके को-आर्डिनेटर समेत दो सेवामुक्त्त

उपायुक्त सह केवीके चेयरमैन मस्तराम मीणा ने कृषि विज्ञान केन्द्र, सुजानी के को-आर्डिनेटर पी के सन्नीग्रही सहित टेक्निकल एक्सपर्ट ललन सिंह को कार्यमुक्त्त कर दिया है। दोनों पर स्टेट मिशन कार्यक्रम के तहत केवीके में वृक्षारोपण और पॉली हाउस निर्माण में 11.60 लाख रुपए से अधिक राशि गबन का मामला पाया गया था।

पीके सन्नीग्रही और ललन सिंह को कार्यमुक्त्त करने की पुष्टि उपायुक्त मीणा ने की है। ‘हिन्दुस्तान’ को उन्होंने बताया कि 18 लाख रुपए के स्टेट मिशन कार्यक्रम के तहत केवीके में वृक्षारोपण और पॉली हाउस निर्माण योजना में लाखों रुपए के घोटाले की भनक उन्हें मिली थी। मामले की सत्यता को लेकर उन्होंने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया।

जांच में सभी आरोप सत्य पाए गए। मामले को गंभीरता से लेते हुए उपायुक्त ने जिला उद्यान पदाधिकारी को आरोपियों पर एफआईआर का निर्देश दिया। निर्देशानुसार नगर थाने में केवीके समन्वयक पी के सन्नीग्रही, तकनीकी पदाधिकारी ललन सिंह समेत जेनटेक फर्म के खिलाफ लाखों की सरकारी राशि गबन करने से संबंधित एफआईआर 15 दिन पूर्व करायी गयी।

उपायुक्त के मुताबिक योजना में फर्जी विपत्र बनाकर आरोपियों ने 11.60 लाख से अधिक राशि का गबन कर लिया। बताते चलें कि हालिया महीने में ही उपायुक्त केवीके का जायजा लेने पहुंचे थे। उस दौरान भी मसले को उठाया गया था जिसमें तत्कालीन समन्वयक सन्नीग्रही ने खुद को निदरेष करार दिया था।

उन्होंने स्टेट मिशन के फंड एलॉटमेंट के संबंध में जानकारी होने से ही इंकार कर दिया था। साथ ही उन्होंने पदाधिकारियों से यह भी था कि राशि किस प्रकार खर्च हुई इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं है। पूरे मामले के पटाक्षेप को लेकर उपायुक्त ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया।

जांच रिपोर्ट में यह बात खुलकर आयी कि फंड संचालन के लिए पी के सन्नीग्रही ने ही बैंक को खाता खोलने और इसके ऑपरेशन के लिए पत्र लिखा। सभी विपत्रों पर दोनों का हस्ताक्षर भी है। वर्ष 2007-2008 की इस योजना की पूरी राशि निकालकर बैंक खाता बंद करा दिया गया।

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