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डिग्री से अलग होगी इंटर शिक्षा

मार्च 2011 तक राज्य के कॉलेजों में डिग्री से इंटर शिक्षा अलग हो जाएगी। राज्य सरकार ने इससे संबंधित पत्र विश्वविद्यालयों को भेजा है। इसमें कहा गया है कि यूजीसी के छठे वेतनमान को लेकर गठित कमेटी की अनुशंसा के आलोक में सरकार ने डिग्री से इंटर शिक्षा को अलग करने का निर्णय लिया है। कहा गया है कि जो भी शिक्षक मार्च 2011 के बाद इंटर की कक्षाएं लेंगे, उन्हें छठे वेतनमान से वंचित कर दिया जाएगा।

दरअसल छठे वेतनमान के लिए गठित कमेटी ने अपनी अनुशंसा में डिग्री के शिक्षकों द्वारा इंटर की कक्षाएं लेने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए, इस पर रोक लगाने की अनुशंसा की है। इस आलोक में मानव संसाधन विकास विभाग ने विवि शिक्षकों के छठे वेतनमान के पैकेज में इस शर्त को शामिल किया है। साथ ही विश्वविद्यालयों को पत्र भेज कर मार्च तक कॉलेजों में इसकी तैयारी करने को कहा है।

डिग्री कॉलेजों से इंटर शिक्षा अलग किए जाने पर 2,20,406 लाख इंटर के छात्र फंसेंगे। इस निर्णय से राज्य के 65 सरकारी डिग्री कॉलेजों के इंटर प्रथम वर्ष के 1,10203 और द्वितीय वर्ष के इतने ही छात्र फंसेंगे। डिग्री कॉलेज के 3960 शिक्षक इंटर की भी कक्षाएं लेते हैं। राज्य के 65 कॉलेजों में औसतन 1920 सीटें हैं। मारवाड़ी कॉलेज और मारवाड़ी वीमेंस कॉलेज में 2604-2604 सीटें हैं। कुल 1,10,203 लाख सीटें इंटर की हैं।

विश्वविद्यालय शिक्षकों के छठे वेतनमान को लेकर गठित कमेटी की रिपोर्ट को लेकर यह बवाल मचा है। शिक्षकों का कहना है कि रिपोर्ट में उनके खिलाफ कहा गया है कि वे इंटर की कक्षाएं लेते हैं, इसलिए यूजीसी वेतनमान के हकदार नहीं है। ऐसे में वे इंटर की कक्षाएं क्यों ले, जबकि उनकी नियुक्ति डिग्री कॉलेज के शिक्षक के पद पर हुई है। उनकी सेवा शर्तें भी डिग्री कॉलेज की हैं।

झारखंड एकेडेमिक कौंसिल ने डिग्री कॉलेजों को प्रबंधन अलग करने की व्यवस्था दी है। इसके तहत एकाउंट अलग कर ए-2 एकाउंट कॉलेजों में खोला गया है, जिसमें इंटर कौंसिल के पैसे होते हैं, जिन्हें इंटर की पढ़ाई पर ही कौंसिल की अनुमति से खर्च किया जा सकता है। इसी राशि से अलग शिक्षक अनुबंध पर रखे जाने का प्रावधान है।

कौंसिल के नियमानुसार अलग प्राचार्य भी होने चाहिए। परंतु इन सबका अनुपालन अब तक संभव नहीं हो पा रहा है। सबसे बड़ी जरूरत अलग भवन की है। कॉलेजों का कहना है कि कौंसिल चाहे, तो वे भवन किराए पर दे सकते हैं। यदि कॉलेज अपने स्तर पर इंटर शिक्षा जारी रखना चाहे, तो इसके लिए उन्हें अलग भवन की व्यवस्था करनी होगी और अलग शिक्षक, कर्मचारी व प्राचार्य नियुक्त करने होंगे।

झारखंड एकेडेमिक कौंसिल की पहल पर इंटर कॉलेजों के लिए पद सृजन का प्रस्ताव तैयार हुआ है। सरकार ने इसका मानक मंडल तैयार किया है, इसमें कॉमर्स, हिंदी, अंग्रेजी व लिटरेचर विषयों के लिए दो-दो एवं अन्य सभी विषयों के लिए एक-एक शिक्षक की जरूरत बताइ गई है। इसके आधार पर ही कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। 65 कॉलेजों में औसतन 15 विषयों के लिए 1950 शिक्षकों की जरूरत होगी। फिलहाल डिग्री कॉलेजों के 3950 शिक्षक हैं, जिनमें आधे को इंटर की कभी कक्षाएं लेना पड़ता है।

प्रो एए खान (कुलपति, रांची) ने कहा कि विवि डिग्री से इंटर अलग होने पर उच्च शिक्षा का स्तर बेहतर होगा। कॉलेज अपने स्तर पर इंटर की शिक्षा कैसे अलग करेंगे, यह उनकी जिम्मेदारी है। विवि ने पहले कभी इंटर शिक्षा में दखल नहीं दिया। यूजीसी की शर्त के अनुसार सरकार ने यह निर्णय लिया है। सरकार के पत्र की प्रति कॉलेजों को उपलब्ध करा दी गई है।

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