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तीन जिंदगियों की तीन कहानी

चिड़ियाघर में कहीं जश्न का माहौल तो कहीं खामोशी का आलम। जिंदगी की जंग जीत चुके नन्हा हाथी और पेलिकन बर्ड जहां जश्न मना रहे हैं, वहीं बुधवार को हुई शेरनी की मौत के बाद बाड़े में सन्नाटा है। जू प्रशासन के लिए बाड़े की रौनक लौटाना बड़ी चुनौती है।

नन्हा हाथी
नन्हा हाथी पुरी तरह ठीक हो चुका है। वह बुधवार को कीचड़ में नहाने के साथ भुट्टा खा रहा था। थकने पर वह थोड़ी देर पेड़ की छाव में सुस्ताने चला जाता है। अब उसकी देखरेख के लिए कोई महावत नहीं है। उसकी देखरेख करने वाले चांडिल के वन पुलिस अफसर को खूब पहचानता है और उनके हाथ से जी भर खाता है। हाथी के बारे में डा. पालित बताते हैं कि वह लगभग ठीक हो गया है। बाहरी तौर पर उसका जख्म भर चुका है, भीतरी चोट का अंदाजा नहीं है। उसे अब एंटीबायोटिक देना बंद कर पेन कीलर व मेडिकल स्प्रे किया जा रहा है। इससे घाव जल्दी भर जाते हैं।

पेलिकन
भिलाई का जल पक्षी पेलिकन बिना किसी साथी के जीना सीख गया है। संकरे पानी से हटाकर अब उसे सफेद बाज के बाड़े के साथ रखा गया है। बुधवार को वह शांत होकर पानी में विचरण करते देखा गया। उसे इस स्थिति में देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उसने हालात से समझौता कर लिया हो। साथी की मौत के एक सप्ताह तक वह संकरे पानी में जिस मुस्तैदी के साथ बैचेन हो विचरता था। अब वैसा नहीं है। 

शेर का खामोश बाड़ा
बच्चे शेर को देखने की तमन्ना लेकर आते हैं और बाड़ा खाली देख लौट जाते हैं। रविवार को चिड़ियाघर में बर्मामाइंस से आए श्रीवास्तव परिवार को बड़ी उदासी हुई। उनकी 8 साल की बेटी की निगाहें बाड़े में शेर को ढूंढ रही थी, लेकिन अब इसमें गरजने के लिए कोई नहीं है। बुधवार को पेट के इंफेक्शन के कारण इकलौती शेरनी की मौत हो गई थी।

इस बारे में जू डायरेक्टर बिपुल चक्रवर्ती ने बताया कि हाथी को रांची जू भेजने के लिए पत्र लिखा गया है। वहां से जब जवाब आएगा, उसी के अनुरूप कारवाई होगी। पेलिकन के लिए अब गुप ब्रिडिंग की योजना बनाई जा रही है। इस पर अभी काम हो रहा है। शेर मंगाने के लिए देश के सभी चिड़ियाघरों को पत्र लिखा गया है। इस बारे में सेंट्रल जू अथारिटी को भी पत्र लिखा गया है।

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  • Web Title:तीन जिंदगियों की तीन कहानी