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बदनामी की चादर उतार विकास की ओर पहल

आने वाले समय में प्रदेश न सिर्फ हाईटेक होगा बल्कि बदनामी की चादर उतार कर विकास के आईने में अपना चेहरा निहारने लायक भी बन सकेगा। मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार गृहनगर आए मुख्यमंत्री ने रविवार को कहा कि अगले दो वर्षो में ढाई सौ तक की आबादी वाले प्रदेश के प्रत्येक गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ देंगे। शीघ्र ही नियुक्तियों की बरसात के साथ ही शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने की भी प्रदेश सरकार की योजना है।

शिक्षा और करिअर :
सर्किट हाउस में रविवार को वरिष्ठ पत्रकारों से मुखातिब मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का कहना है कि आने वाले समय में आठवीं कक्षा से आईटीआई शिक्षा को अनिवार्य किया जा सकता है। हालांकि प्रैक्टिकल मैट्रिक के बाद ही कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य है कि हमारे कम पढ़े-लिखे युवा भी एक अदद नौकरी के लिए न भटकें और छोटे-मोटे रोजगार खुद संचालित कर सकें।

साथ ही, सरकार दिसंबर से पहले विभिन्न विभागों में 80 हजार नियुक्तियां कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से करना चाहती है। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। इन नियुक्तियों में अधिकांश तृतीय और कुछ चतुर्थ श्रेणी के पद होंगे। ये नियुक्तियां सचिवालय सेवा, कमिश्नरी और जिला स्तर के होंगे।

जो नियुक्तियों जिला स्तर पर होती थी, हमारी कोशिश है कि आयोग के माध्यम से ही हों। साथ ही अभ्यर्थी को बार-बार फार्म न भरना पड़े इसके लिए एक परीक्षा में क्वालीफाई करने वाले की योग्यता अधिक हो तो वह उसी फार्म के आधार पर दूसरे में बैठ सके। इससे अभ्यर्थी के साथ सरकार की भी मेहनत कम होगी। सीएम का कहना है कि इसके लिए लीगल सलाह भी ले रहे हैं ताकि आगे कोई परेशानी न हो।

प्राथमिकताएं :
मुंडा का मानना है कि अल्प अवधि की योजनाएं नहीं बननी चाहिए। इसलिए प्रदेश सरकार भी अगले तीन साल की प्राथमिकताएं तय कर रही है और इसका एजेंडा भी स्पष्ट है। सरकार की प्राथमिताओं में उपभोक्ता आधारित चीजें, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास सबसे ऊपर है।

पारदर्शिता और प्राथमिकता आधारित एजेंडा :
अगले साल राज्य का बजट आनलाइन कर दिया जाएगा। इसे हर कोई नेट पर देख सकेगा। हर व्यक्ति जान सकेगा कि उसके गांव को क्या मिला है या किस गांव की स्थिति क्या है। हम सभी लोगों की सभी जरूरतें एक साथ पूरी नहीं कर सकते। और पूरी तरह नीड बेस्ड बजट की क्षमता न तो प्रदेश के पास है और न ही देश के पास। मगर हम प्रथमिकताएं तय कर बेहतर एजेंडा तैयार कर सकते हैं।

बिजली-पानी :
सरकार बिजली के लिए प्राइवेट कंपनियों को प्रोत्साहित करेगी। अभी स्थिति है कि सरकार टीवीएनएल से 100 करोड़ की बिजली खरीदती है तो 25 करोड़ प्रतिमाह उसको देती है। काफी नुकसान उठाना पड़ता है। हमने एनटीपीसी से एक अफसर मांगा था। उन्होंने अनिल कुमार का नाम दिया है। उनका कद एमडी स्तर का होगा। हमारी कोशिश है कि बिजली कट पर पूरी तरह काबू पाया जा सके। साथ ही सरकार जल संरक्षण को बढ़ावा देगी। हम नई परियोजना से 78 किमी कैनाल में अगले वर्ष तक पानी दे देंगे। 

सरकारी मैकेनिज्म
हमारी कोशिश है कि सरकार सर्विस प्रोवाइडर की तरह काम करे, जिसकी जिम्मेदारी रिसोर्स लाने की हो। जब हम इस नजरिये से देखते हैं तो गांव का एक गरीब दिखाई देता है। उस तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए हम डिलीवरी मैकेनिज्म को मजबूत बना रहे हैं। जिसको जो कुछ देना है, वह उसी को मिले, यह हमारी पहली कोशिश है। दूसरी यह रिसोर्स एरिया है इसलिए लीकेज की संभावनाएं बनी रहती है, जिसे बंद करना एक चुनौती है।

हाईवे
बरही से बहरागोड़ा तक फोर लेन का काम शुरू है। अभी घाटशिला के माहुलिया गांव तक के लिए आदेश हो गया है। अब इसे बढ़ाकर अगले चरण में बहरागोड़ा तक ले जाना है। साथ ही पलामू से यूपी तक की सड़क अच्छी और 2 लेन की बनाएंगे। चाईबासा से चंपुआ और रांची से जैंतगढ़ को जल्द टेकअप करने की योजना है। रांची में रिंग रोड शीघ्र बनकर तैयार हो जाएगा। रांची-गढ़वा में फ्लाईओवर की योजना भी बन चुकी है।

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