अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

कश्मीरी पंडितों की सुध कौन लेगा

हाल की घटनाओं ने एक बार फिर कश्मीर को देश की केंद्रीय समस्या के रूप में सामने रखा है। इसमें कोई दो राय नहीं कि घाटी में अनेक मासूम बच्चों की जानें चंद स्वार्थी तत्वों के उकसावे के कारण चली गईं, लेकिन इसकी आड़ में देश को ब्लैकमेल करने की राजनीति कब तक होती रहेगी? ठीक है, वहां अशांति थी और उसे सामान्य करने की जिम्मेदारी देश की हुकूमत पर भी आयद होती है, लेकिन क्या घाटी से पलायन हुए लोगों के जख्मों पर मरहम लगाने की जिम्मेदारी भी केंद्र को नहीं निभानी चाहिए? राजनीतिक दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल कश्मीर के दौरे पर गया, लेकिन दिल्ली के कई इलाकों में वर्षो से खानाबदोश की जिंदगी जी रहे कश्मीरी पंडितों की बात किसी ने नहीं उठाई, क्यों?               
रमेश शर्मा, कश्मीरी गेट, दिल्ली

फिर एक विवाद
कॉमनवेल्थ खेल आयोजन समिति की समस्याएं घटने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां खेल गांव में खिलाड़ियों के लिए बने खाने की तारीफ हो रही थी, वहीं आयोजन में जुटे कर्मचारियों के लिए परोसे जाने वाले खाने की आलोचना हो रही है। शुक्रवार को सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम और कादरपुर शूटिंग रेंज में कर्मचारियों के लिए आए खाने से बदबू आ रही थी, जिसके कारण पूरा का पूरा खाना लौटा दिया गया। गौरतलब है कि वॉलंटियर, पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवान और कई विभागों के कर्मचारी जी-जान से आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। अगर ऐसा खाना खाकर वे बीमार हुए, तो आयोजन कैसे सही तरीके से निपटेगा। कादरपुर में तो हालत और भी खराब है, क्योंकि वह अरावली की पहाड़ियों से घिरा इलाका है और वहां चार किलोमीटर तक कोई दुकान ही नहीं है। इसलिए अब दिल्ली सरकार को इस मामले पर ध्यान देना चाहिए।
अरुण सरोहा, मालवीय नगर, नई दिल्ली

हम सब एक हैं
गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या में विवादित भूमि को लेकर एक अहम फैसला दिया। फैसला जो भी हुआ, उसको हर सच्चे हिन्दुस्तानी ने संयम और धैर्य के साथ सुना, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम। सभी ने अमन और शांति को बनाए रखा, जो काबिले तारीफ है। लोगों ने जिस समझदारी का परिचय दिया है, इससे तो यही साबित होता है कि हिंदू-मुस्लिम होने से पहले वे एक सच्चे हिन्दुस्तानी हैं।
रेणु भास्कर, दिल्ली विश्वविद्यालय

उम्मीद जगाता शोध
विज्ञान पत्रिका ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस’ में प्रकाशित शोध के अनुसार, किसी व्यक्ति के सिर पर शक्तिशाली चुंबक रखने से व्यक्ति के सिर पर बने चुंबकीय क्षेत्र के कारण दिमागी क्रियाविधि में ऐसा बदलाव होता है कि उसकी निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। साफ है, इससे लोगों के काम करने के तरीकों को भी बदला जा सकता है और यह शक्ति लोगों के फैसले करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है। अगर रक्षा वैज्ञानिक ध्यान दें, तो ऐसे हथियारों की कल्पना संभव है, जिनसे ऐसी ही चुंबकीय तरंगें निकलें, जो आतंकवादियों के फैसले लेने की क्षमता को प्रभावित कर दें। यदि ऐसा हुआ, तो आतंक का सामना करने में राज्य की ऊर्जा कम खपत होगी।
स्वप्नेश चौहान, देव संस्कृति विश्व.

मीडिया को सलाम
मीडिया का काम मात्र खबर देना है, ऐसा सोचने वालों के आगे मीडिया ने एक बार फिर अपनी जिम्मेदार कार्य-प्रणाली का प्रमाण प्रस्तुत किया है। हाल ही में एक न्यूज चैनल द्वारा चार सिपाहियों की जान बचाकर समाज के सामने मानवीयता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। सदैव आलोचना व खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने के आरोप सुनने वाले मीडिया को आज भारतीय जनता का प्रणाम। समाचार प्रस्तुत करने वाली इस संस्था ने ‘मानवीयता’ को सर्वोपरि मानकर चार लोगों की जान ही नहीं बचाई है, वरन् चार परिवारों के चेहरों की मुस्कान बनाये रखकर भारतीय मूल्यों को स्थापित किया है। 
प्रोमिला चोपड़ा, डीपीएस, रोहिणी

परिपक्व होता लोकतंत्र
अयोध्या के ऊपर माननीय उच्च न्यायालय का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया। कोर्ट में तीनों जजों ने बहुत ही अच्छा फैसला दिया है। अब जरूरत इस बात की है कि हम सभी इस फैसले को खुले मन से आत्मसात करें, क्योंकि इस फैसले के बाद हमको मिल-जुलकर दुनिया को यह दिखाना है कि हम एक परिपक्व लोकतंत्र हैं। 
आशीष चौरसिया, गोंडा

विशिष्ट बीटीसी
उत्तराखंड में वर्तमान समय में सबसे अधिक बीएड डिग्रीधारक हैं। इनकी संख्या निजी बीएड कॉलेज की बढ़ोतरी के साथ लगातार बढ़ती जा रही है। राज्य के शिक्षा मंत्री आये दिन विज्ञप्ति जारी करने की बात करते जा रहे हैं, लेकिन यह केवल झूठे आश्वासनों के जरिये प्रशिक्षितों के हितों से खिलवाड़ किया जाना ही है। राज्य के बीएड प्रशिक्षितों की संख्या लाखों में पहुंचने वाली है, जो आने वाले समय में राज्य सरकार के गले की फांस बन सकती है। इसलिए राज्य सरकार को किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण जल्द शुरू कर देना चाहिए। तभी स्थिति संभलेगी।
दिगम्बर सिंह, रुद्रप्रयाग

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:कश्मीरी पंडितों की सुध कौन लेगा