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आजा नच लै..

दोस्त के आने पर भी वह बहुत खुश नहीं हो पाए थे। उन्हें चाय पिलाई थी, लेकिन कहीं खोए-खोए से थे। दोस्त ने जान लिया था कि यार किसी तनाव में है। सो, दोस्त ने अचानक कहा, ‘यार, चल डिस्को चलते हैं।’ इस पेशकश पर अचकचा गए थे वह। वह बोले, ‘मैं और नाचना-गाना!’
 
डर्बी यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक जम कर नाच लेने से मन मस्त होने लगता है। दरअसल, नाचना एक लय और ताल में एक्सरसाइज है। उससे हमारे स्ट्रेस हारमोन कम हरकत करते हैं और टेस्टोरेन का स्तर बढ़ जाता है। जाहिर है हमारा तनाव कम होने लगता है और मन हल्का हो जाता है।
 
असल में अगर हम एक समूह में नाच-गाना करते हैं, तो उस माहौल में खोने लगते हैं। उसी का असर होता है कि हम बिल्कुल अभी में चले जाते हैं। आमतौर पर हमारे तनाव का रिश्ता किसी पिछली घटना से होता है। वह हमें परेशान कर रही होती है।

अब जैसे ही हम उसे छोड़ कर आगे बढ़ते हैं, हमारी परेशानी भी दूर होने लगती है। हम एक ऐसे हाल में पहुंच जाते हैं, जब न बीते वक्त की कोई चिंता होती है। और न आने वाले वक्त को लेकर परेशानी। हम अपने बिल्कुल अभी में मस्त हो जाते हैं।
 
तनाव और दबाव के साथ एक बात होती है। हम जब एक बार उससे बाहर आ जाते हैं, तो लौटने पर भी उस कदर परेशान नहीं होते यानी एक बार बाहर हो जाने से सब बदल जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो तब होती है, जब हम पहले-पहल किसी चीज को लेकर तनाव में आते हैं। वह दौर निकल जाने के बाद उसका वही असर नहीं हो सकता। साइकोलॉजिस्ट मानते हैं कि तनाव का सबसे अहम दौर पार करने पर जब हम लौटते हैं, तो उसका असर 75 प्रतिशत तो कम हो ही जाता है। तो क्या सोचा आपने?

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