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दिल की बातें

वैज्ञानिक काफी वक्त से छठी इंद्रिय यानी ‘सिक्स्थ सेंस’ पर काम कर रहे हैं। यह तो मालूम है कि अक्सर लोग दूसरे के दिल की बात बिना कहे समझ लेते हैं। गहरे दोस्तों या पति-पत्नी और प्रेमी-प्रेमिकाओं को यह अनुभव अक्सर होता है, लेकिन इसका वैज्ञानिक आधार या पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अब इस क्षेत्र में सिडनी के टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नई चीज जोड़ी है।

उन्होंने पाया कि जिन दंपतियों में अच्छा तालमेल होता है, उनके तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम भी सामंजस्य के साथ काम करते हैं। शोधकर्ताओं ने ऐसे दंपतियों को एक साथ काउंसिलिंग में बिठाया और उनके दिल और दिमाग की गतिविधियों को मापने के लिए मॉनिटर लगाए। उन्होंने पाया कि दोनों के दिल-दिमाग की गतिविधियों में बदलाव एक साथ एक जैसे हो रहे थे। इसका अर्थ यह हुआ कि सिर्फ उनका मन ही नहीं, उनके दिमाग भी तालमेल में काम कर रहे थे।

जाहिर है इस शोध के आगे अभी बहुत कुछ किया जाना है, लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि बिना किसी प्रत्यक्ष संवाद के उनके दिमाग की रासायनिक और विद्युत चुंबकीय क्रियाएं एक जैसी हो रही थीं। शोधकर्ताओं का यह सोचना है कि शायद घनिष्ठ दोस्तों और परिजनों के साथ भी यह होता हो। इससे आगे का रास्ता ज्यादा कठिन है।

सवाल यह है कि ऐसा कैसे होता है यानी इस परिघटना की वैज्ञानिक वजह क्या है? किस तरह से सूचना बिना किसी प्रत्यक्ष संवाद के एक दिमाग से दूसरे दिमाग तक पहुंचती है? क्या कोई ऐसी विद्युत-चुंबकीय तरंगें हैं जो हम खोज नहीं पाए हैं, जो एक दिमाग से दूसरे दिमाग को संदेश पहुंचाती हैं? और अगर ऐसी तरंगें हैं तो इनके गुणधर्म क्या हैं?

आधुनिक विज्ञान में चेतना के व्यापक स्वरूप पर खोज बहुत कम हुई है। आधुनिक विज्ञान का आधार यह है कि सृष्टि का आधार पदार्थ है और चेतना को जीवों के गुण की तरह देखा गया है। चेतना को दिमाग या तंत्रिका तंत्र के कार्य की तरह समझने की कोशिश की गई है। यह पुरानी या क्लासिकल भौतिकी से उपजी अवधारणा है, जो कि स्वाभाविक भी है क्योंकि शरीर विज्ञान का विकास इसी भौतिकी के पीछे-पीछे हुआ।

चेतना के क्षेत्र में अगर कुछ काम हुआ है तो वह दिमाग की रासायनिक या विद्युत चुंबकीय क्रियाओं को समझने की नजर से हुआ है। अब कई नामी वैज्ञानिक जिनमें डेविड बॉम और रॉजर पेनरोज जैसे नाम भी हैं, जो क्वांटम सिद्धांत की रोशनी में चेतना को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

जीवन का ज्यादातर हिस्सा विज्ञान की पहुंच के बाहर है, लेकिन वह सार्थक और सुंदर है। उसी में एक चीज बिना कहे अपने प्रिय व्यक्ति की दिल की बात समझ लेना है। इसकी वजह से ही आपस में समझदारी, सहानुभूति और प्रेम बढ़ता है, जो जीवन को सुंदर बनाता है। विज्ञान जब उसे समझेगा तब समझेगा, लेकिन तब तक हम आंखें बंद करके सह-अनुभूति की इन अदृश्य तरंगों को महसूस तो कर सकते हैं।

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  • Web Title:दिल की बातें