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भारतीय दल को मिला दर्शकों का असीम प्यार

भारतीय दल को मिला दर्शकों का असीम प्यार

बीजिंग ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा की अगुवाई में भारत का 600 से अधिक सदस्यों का दल रविवार को उद्घाटन समारोह के दौरान जैसे ही जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में अवतरित हुआ, दर्शकों की तालियों से पूरा माहौल गूंज उठा। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोनों ने जोरदार तालियों से खिलाड़ियों की हौसला आफजाई की।

मेजबान होने के कारण भारतीय दल सबसे अंतिम यानी 71वें नंबर पर स्टेडियम में पहुंचा तो पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गडाहट से गूंज उठा। दर्शकों ने खड़े होकर इंडिया, इंडिया और जीतेगा भई जीतेगा इंडिया जीतेगा के नारों के साथ अपने खिलाड़ियों का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर तथा खेल मंत्री एमएस गिल ने खड़े होकर भारतीय खिलाड़ियों का अभिवादन किया। प्रिंस चार्ल्स और उनकी पत्नी कैमिला पार्कर ने भी खड़े होकर तालियां बजाते हुए मेजबान देशों के खिलाड़ियों का उत्साह बढाया।

भारत के पुरुष खिलाड़ियों ने मरून रंग की शेरवानी और काले रंग की पैंट पहन रखी थी जिस पर स्वरोस्की के क्रिस्टल लगे हुए थे। महिला खिलाड़ियों ने लाल रंगी साड़ी पहन रखी थी जिस पर हरे रंग की हल्की धारियां थी। भारतीय खिलाड़ी इस बीच बैकग्राउंड में बज रहे संगीत की धुन पर थिरकते भी रहे।

भारत के ध्वजवाहक बिंद्रा सबसे आगे थे जिनके पीछे कई स्टार खिलाड़ियों की जमात थी। इनमें विश्व कुश्ती चैंपियन सुशील कुमार और उनकी तरह बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले विजेंदर सिंह, टेनिस स्टार लिएंडर पेस, महेश भूपति, सोमदेव देववर्मन और रोहन बोपन्ना शामिल थे। टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा अपनी तैयारियों के कारण परेड में भाग नहीं ले पाई।

भारत को सबसे अधिक पदकों की संभावना निशानेबाजी से है इसलिए सबकी निगाह बिंद्रा के अलावा गगन नारंग, रंजन सोढ़ी, मानवजीत सिंह संधू और तेजस्विनी सावंत जैसे विश्व चैंपियन पर टिकी रही। बैडमिंटन की तारिका साइना नेहवाल, चेतन आनंद और ज्वाला गुटा, टेबल टेनिस में मेलबर्न 2006 के एकल चैंपियन अचंता शरत कमल तथा तीरंदाज जयंत तालुकदार और डोला बनर्जी पर भी कैमरों की चमक पड़ती रही।

भारत ने इस बार सबसे बड़ा दल खेलों में उतारा है। भारत के कुल 619 सदस्यीय दल इन राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेगा। इसके बाद आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा का दल सबसे बड़ा है। पिछली बार के मेजबान आस्ट्रेलिया के दल ने सबसे पहले स्टेडियम में कदम रखा जिसकी ध्वज वाहक नेटबाल खिलाड़ी शेरिल मैकमोहन थी। वह 1998 में कुआलालम्पुर में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थी और यह उनका चौथा राष्ट्रमंडल खेल है। आस्ट्रेलिया का लगभग 500 सदस्यीय दल खेलों में शिरकत करेगा लेकिन परेड में उसके आधे से कुछ ही अधिक सदस्यों ने ही भाग लिया। आस्ट्रेलिया के बाद अंग्रेजी वर्णमाला के अनुसार विभिन्न देशों के खिलाड़ी स्टेडियम में पहुंचे।

विदेशी टीमों में आस्ट्रेलिया के अलावा कनाडा को दर्शकों की सबसे अधिक तालियां मिली। इसका एक कारण यह भी था कि उसके ध्वज वाहक भारतीय मूल के केन परेरा थे जो उसकी राष्ट्रीय हाकी टीम के कप्तान हैं। पाकिस्तान ने हालांकि इन सभी देशों को पीछे छोड़ दिया जिसका नाम आते ही स्टेडियम में काफी उत्साह से तालियां बजायी गयीं। पाकिस्तान ने 75 सदस्यीय दल दिल्ली भेजा है लेकिन इनमें से आधे खिलाड़ी ही परेड में आए जिन्होंने हरे रंग का ब्लैजर और सफेद रंग की पैंट पहन रखी थी।

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों के दलों का भी तालियों के साथ स्वागत किया गया। दर्शकों में सिंगापुर और जाम्बिया के चहेतों की भी कमी नहीं रही। अफ्रीकी महाद्वीप के कई देशों के खिलाड़ी अपनी पारंपरिक वेशभूषा में आए। इनमें नाइजीरिया की सफेद और हरे रंग की पोशाक दर्शकों का मन मोह गई। दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी वुवुजेला लेकर आए थे जो विश्व कप फुटबाल के दौरान काफी चर्चा में था और अब इन खेलों में भी अपना जलवा दिखाने के लिए तैयार है।

मार्च पास्ट के दौरान भारत की अनेकता में एकता को दर्शाती विविधतापूर्ण संस्कृति की झलक भी बखूबी पेश की गई और हर दल के आगे चल रही युवती ने विभिन्न संस्कृतियों को दर्शाते परिधान धारण कर रखे थे। किसी दल के आगे चल रही युवती साड़ी में थी तो किसी ने घाघरा पहन रखा था। पंजाबी सलवार कुर्ते से लेकर दक्षिण, पश्चिम और पूर्वी भारत के पहनावे में आई इन युवतियों के पीछे विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने अपने कदम बढ़ाए। इस बार की विशेष बात यह रही कि खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम में ही बैठने की व्यवस्था की गई थी।

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