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सेटेलाइट फोन

सेटेलाइट फोन या सेटफोन ऐसा मोबाइल फोन होता है जो लैंडलाइन या सेल्युलर टॉवरों के बजाय उपग्रहों से सिग्नल प्राप्त करता है। सेटफोन्स का फायदा ये है कि वह किसी भी स्थान से फोन कॉल कर सकते हैं, चाहे वह सहारा मरुस्थल हो या एवरेस्ट की चोटी या फिर अफ्रीका के कोई घना जंगल। मतलब, यह जमीन, हवा या पानी में कहीं भी संकेत पकड़ सकता है।

सेटफोन का नुकसान बातचीत में आने वाली अड़चन के रूप में होता है क्योंकि सिग्नल को उपग्रह तक पहुंचने और लौटकर आने में समय लगता है। इसके अलावा, सेटेलाइट के जरिए इस्तेमाल होने वाला खर्च भी सेल्युलर फोनों की अपेक्षा कहीं अधिक होता है। हालांकि यह कमियां सेटफोन के फायदों के सामने नगण्य साबित होती हैं।

किसी आपदा की सूरत में यह दुनिया के दूर-दराज इलाकों में ऐसे समय संपर्क साध सकते हैं, जब अन्य संचार साधन जवाब दे जाते हैं। शोधकर्ता, घुमक्कड़ और फौजी इसके सहारे अपने परिवारजनों के संपर्क में रह सकते हैं। लेकिन सभी देशों के सेटफोन के बारे में अलग-अलग कानून हैं। भारत में सेटफोन हासिल करने के लिए विशेष कानून हैं।

कुछ समय पूर्व एक विदेशी यात्री एंडी पैग को देश में बिना सूचित किए सेटफोन लाने के आरोप में पकड़ा गया था। हमारे देश में पर्यटकों को सेटफोन लाने से पूर्व कानून को सूचना देनी होती है। तीन कंपनियां इरीडियम, ग्लोबलस्टार और थराया सेटफोन सेवाएं देती हैं। इनमें इरीडियम की सेवा पूरी दुनिया में, ग्लोबलस्टार 80 प्रतिशत हिस्से और थराया की सेवाएं भारत, एशिया के अन्य हिस्सों, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और यूरोप में हैं।

सेटफोन सेवा लेने के लिए कंपनी के साथ अनुबंध करना होता है। इनकी कीमत नेटवर्क कवरेज एरिया के हिसाब से आंकी जाती है। कुछ सेटफोन सेवाप्रदाताओं ने सेल्युलर सेवादाताओं के साथ भी अनुबंध किए हैं। इससे सेल्युलर इस्तेमालकर्ता जरूरत के अनुसार सेटफोन सेवा का लाभ उठा सकते हैं। यह सुविधा आपदा प्रबंधन, सैन्य सेवाओं आदि क्षेत्रों के लिए आदर्श होती हैं।

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