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खुशी चाहिए तो जगाएं आत्मविश्वास

खुशी चाहिए तो जगाएं आत्मविश्वास

इंसान अपने जीवन में संपूर्ण संतुष्टि तब महसूस करता है, जब उसके अंदर छिपे हुए दो गुण प्रकट होते हैं। जब तक ये गुण प्रकट नहीं होते, तब तक इंसान अपने अंदर खालीपन और कमी महसूस करता है।

जिस तरह कोई फिल्म जब तक रिलीज नहीं होती, तब तक उस फिल्म के कलाकार और निर्देशक संतुष्टि महसूस नहीं करते, उसी तरह हमारे अंदर छिपे हुए ये दो गुण जब तक पूरी तरह से प्रकट नहीं होते तब तक हम अपने आपको अधूरा महसूस करते हैं।

ये दो गुण कौन से हैं? ये दो गुण हैं - विश्वास और प्रेम। विश्वास अगर प्रकट न हो तो हमारे जीवन में कोई खुशी नहीं आती। प्रेम अगर प्रकट न हो तो हमारे हृदय में कोई सुखद भावना नहीं रहती। विश्वास से प्रेम जगाया जा सकता है, प्रेम से विश्वास पाया जा सकता है। दोनों एक दूसरे की मदद करते हैं। ईश्वर पर विश्वास, भक्ति को जगाने में काम आता है। ईश्वर की भक्ति अटूट विश्वास पैदा करने में आपकी मदद करती है।

विश्व में बहुत से चमत्कार होते हुए देखे गए हैं। लोग विशेष स्थानों पर जाकर बीमारियों से मुक्ति प्राप्त करके लौटते हैं। वह स्थान कोई पहाड़ हो, मंदिर, चर्च, दरगाह, गुरुद्वारा या जंगल हो लेकिन विश्वास प्रकट करने में वह स्थान मदद करता है। इन स्थानों पर लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं, जिसका कारण विश्वास ही है।

विश्वास विश्व की सबसे शक्तिशाली तरंग है। इस तरंग में तरंगित होकर इंसान का शरीर खिल जाता है। इस तरंग में भय और चिंता की नकारात्मक तरंगें नष्ट हो जाती हैं।

जीज्मस ने अपने जीवन काल में जितने भी चमत्कार किए, उसके पीछे आत्मविश्वास की शक्ति काम कर रही थी। जीज़स ने लाइलाज लोगों से यही कहा कि 'यदि तुम ठीक होने का आत्मविश्वास रखते हो तो यह विश्वास तुम्हें ठीक कर देगा।'

विश्वास में यदि इतनी शक्ति है कि हम रोग मुक्त हो सकते हैं, जो चाहें वह पा सकते हैं तो हमें यह शक्ति प्रकट करने की कला सीखनी होगी। इस शक्ति से आप दुनिया की सभी चीजें, सफलताएं प्राप्त करेंगे ही, साथ में तेज प्रेम प्रकट करके अपना बंद हृदय ईश्वर के लिए खोल भी पाएंगे। जब यह होगा, तब आपको किसी और चीज की आवश्यकता नहीं होगी। आपका जीवन आनंद की अभिव्यक्ति में बहकर महाजीवन बनेगा।

आत्मविश्वास की यह शक्ति अप्रकट रखकर आप बहुत सीमित व दु:खद जीवन जीते हैं। बिना विश्वास के जीवन अनुमानों व शंकाओं से भरा रहता है। नकारात्मक शंकाओं से विश्वास टूटने लगता है और उस विश्वास का स्थान डर ले लेता है। डरा हुआ इंसान सिकुड़कर जीता है। आत्मविश्वास से भरा हुआ इंसान खुलकर जीता है और खुलकर देता है।

अविश्वास में इंसान हमेशा देने से घबराता है और अभाव की स्थिति में जीता है। वह नफरत और द्वेष का तुरंत शिकार हो जाता है। इसलिए अपने आपमें विश्वास की शक्ति जगाएं और सफलता की पहली नींव डालें।

इन बिंदुओं पर मनन करें :

* हर इंसान का मन एक आम जैसा है, जिसके एक सड़े हुए भाग को तोलू मन कहा गया है।

* हर अविश्वासी इस मन से परेशान है और हर विश्वास इस मन का मालिक है।

*जब तक मन में विश्वास नहीं जगता, तब तक कामयाबी नहीं मिलती।

*विश्वास में इतनी शक्ति है कि हम हर रोग से मुक्त हो सकते हैं।

*विश्व का हर पवित्र स्थान आपके अंदर का विश्वास प्रकट करने के लिए मदद करता है।

*विश्वास से विकास और विकास से विश्वास का विकास होता है।

*विश्वास से प्रेम जगाया जा सकता है, प्रेम से विश्वास पाया जा सकता है।

* पवित्र मन, प्रेम और विश्वास से इंसान संपूर्ण जग जीत सकता है।

*मन विश्वास में नहाकर दोष मुक्त हो जाता है।

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