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दो टूक (03 अक्टूबर, 2010)

वर्षो की तैयारियों के बाद आज वह घड़ी आ पहुंची है। राष्ट्रमंडल खेलों का आगाज आज से होने जा रहा है। यह खेल हमारे लिए सिर्फ खेल नहीं हैं।

यह अलग-अलग देशों और उनकी संस्कृतियों से आए लोगों के साथ दुनिया को अपनी संस्कृति और सभ्यता से परिचित कराने का मौका भी है। मेहमाननवाजी में मेजबान को ढेरों तैयारियां करनी होती हैं। जिसमें परेशानियां तो आती हैं, लेकिन व्यापक परिप्रेक्ष्य में ये परेशानियां हमें जिम्मेदारी का बोध कराती हैं।

ध्यान रखना है कि मेहमानों की खातिरदारी में आने वाली दिक्कतों को हम विनम्रता से सह लें। ताकि, मेहमान हमारे देश की संस्कृति, सदाचार, विनम्रता और खातिरदारी की याद संजोकर यहां से जाएं।

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  • Web Title:दो टूक (03 अक्टूबर, 2010)