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राज्य सूखाग्रस्त, आपदा प्रबंधन प्राधिकार निष्क्रिय

पूरा राज्य सुखाड़ घोषित है। केन्द्र से आवश्यक सहायता की मांग की गयी है। राज्य में आपदा प्रबंधन विभाग राज्य में रिलीफ का काम चला रही है वहीं दूसरी ओर राज्य में गठित आपदा प्रबंधन प्राधिकार पूरी तरह निष्क्रिय है। सही अथों में प्राधिकार कागजी साबित हो रहा है। एसे समय में प्राधिकार की महत्वपूर्ण भूमिका है।

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत राज्यपाल ने 28 मई 2010 को झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार का गठन किया है। मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष  हैं। आपदा प्रबंधन, गृह, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि, जल संसाधन, राजस्व एवं पथ निर्माण विभागों के मंत्री इसके सदस्य बनाए गए हैं। मुख्य सचिव इसके मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह सदस्य बनाए गए हैं। प्राधिकार क ा गठन हुए पांच महीने बीत गए लेकिन अभी तक प्राधिकार की एक भी बैठक नहीं हुई। मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के कार्यकाल में प्राधिकार का गठन किया गया था।  एक्ट में कहा गया है कि प्राधिकार के कार्यो के संचालन के लिए प्राधिकार में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बहाली की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार एक अलग स्थान भी मुहैया कराएगी। लेकिन अभी तक प्राधिकार के लिए किसी अधिकारी एवं कर्मियों की नियुक्ति नहीं की गयी है। यहां तक की प्राधिकार के सलाहकार परिषद का गठन नहीं किया गया है।
क्या है प्राधिकार के मुख्य काम
प्राधिकार के गठन का मुख्य उदद्ेश्य एवं दायित्व राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए नीतियां और योजनाएं  बनाना है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार द्वारा जो गाइडलाइन दी गयी है,उसके अनुरूप स्टेट प्लान तैयार करना है। विभिन्न विभागों द्वारा जो आपदा प्रबंधन की बनायी गई योजनाओं को स्वीकृति प्रदान करना है। अन्य प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं :
प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, भूकंप, तूफान, अतिवृष्टि, अनावृष्टि आदि के शिकार लोगों क ो रिलीफ पहुंचाने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश  तैयार करना।
आपदा प्रबंधन के लिए  फंड के प्रावधान की अनुशंसा करना तथा सुरक्षा की तैयारी करना ,
आवश्यकतानुसार विभिन्न विभागों के लिए गाइडलाइन जारी करना,
प्राधिकार के स्टेट एक्सक्यूटिव कमेटी के कार्य
प्राधिकार के  अंतर्गत स्टेट एक्सक्यूटिव कमेटी का गठन किया गया है। मुख्य सचिव इसके पदेन अध्यक्ष सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बनाए गए हैं। प्राधिकार के कार्यों को संचालित करने ,मॉनिटरिंग करने और राष्ट्रीय एवं राज्य योजनाओं के कार्यान्वयन की जिम्मेवारी इसी के ऊपर है। राज्य के विभिन्न भागों में आपदा के प्रभाव का परीक्षण और उससे निपटने के उपायों क ा विशिष्टकरण करना। विभिन्न विभागों के लिए एव जिला प्राधिकार के लिए आपदा प्रबंधन की योजनाओं के लिए गाइड लाइन तैयार करना है। कमेटी किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय सरकार के किसी भी विभाग या जिला प्राधिकार को एक्शन लेने के लिए निदेश दे सकती है। कमेटी आपदा प्रबंधन में लगे सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं को सलाह , सहायता एवं समन्वय का कार्य करेगी। आपदा प्रबंधन के कायों को प्रभावकारी ढंग से संचालित करने के लिए कमेटी आवश्यक तकनीकी सहायता मुहैया कराएगी। यह आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर राष्ट्रीय प्राधिकार को सूचनाएं प्रदान करेगी।

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