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जिनसे जुड़ा है इस्पात परिवार

इरादों में इस्पात की मजबूती, आंखों में इस्पात की चमक, इस्पात साम्राज्य की साम्राज्ञी हैं सावित्री जिंदल। वे एशिया की सबसे अमीर मां हैं। देश की सबसे अमीर महिला हैं। जानी-मानी पत्रिका फोर्ब्स के ताजे सर्वेक्षण में सौ भारतीय धनी लोगों की सूची में शामिल पांच महिलाओं में जिंदल समूह की अध्यक्ष सावित्री जिंदल सबसे ऊपर हैं।

धनियों की इस सूची में सावित्री जिंदल अनिल अंबानी को पछाड़ कर पांचवें नम्बर पर पहुंची हैं। अनिल अंबानी बीते साल इस सूची में तीसरे नम्बर पर थे। दिलचस्प बात यह है कि सावित्री जिंदल लगातार चौथी बार सबसे धनी भारतीय महिला बनी हैं। उनकी कुल पूंजी 14.4 अरब डालर है। दुनिया के अमीरों की सूची में उनका स्थान 44वें नम्बर पर हैं। असम के तिनसुखिया में 20 मार्च 1950 में जन्मी सावित्री जिंदल बेहद साधारण महिला हैं। जिंदल समूह का मोर्चा संभालने से पहले वे अपना अधिकांश समय घरेलू और सामाजिक कामों में व्यतीत करती थीं।

वर्ष 2005 में पति और जिंदल समूह के अध्यक्ष ओपी जिंदल के हेलीकाप्टर दुर्घटना में निधन के बाद वे जिंदल समूह की अध्यक्ष बनीं। उनके दस बेटे-बेटियां हैं। बेटा नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र से लोकसभा सांसद है। अपनी मां और पिता की ही तरह नवीन दूरदृष्टा हैं। राजनीति के साथ जिंदल समूह की कंपनियों का भी वे संचालन करते हैं।

सावित्री जिंदल अपने साम्राज्य में सीधा हस्तक्षेप नहीं करती हैं। उन्होंने समूह में अपनी उपस्थिति से पूरे कुनबे को एकता के सूत्र में बांध रखा है। उनके दिशा-निर्देशन में देश में जिंदल समूह अनेक सामाजिक कामों को अंजाम देता है।

समूह के प्रबंध निदेशक उनके छोटे सांसद बेटे नवीन जिंदल हैं। समूह पर छत्रछाया सावित्री जिंदल की है, लेकिन बागडोर अपनी मां के संरक्षण में नवीन जिंदल ही संभालते हैं। हरियाणा के हिसार में प्रतिष्ठित आवासीय विद्या देवी जिंदल स्कूल का भी प्रबंधन सावित्री जिंदल देखती हैं। उनकी देखरेख में यह स्कूल बुलंदियों तक पहुंचा है। इस स्कूल में पढ़ने वाले देश के प्रमुख जगहों पर कार्यरत हैं।

पति की मृत्यु के बाद सावित्री जिंदल राजनीति में भी कूदी। पति ओपी जिंदल की हरियाणा में बंसीलाल की सरकार बनाने में अहम भूमिका थी। पहली बार जब वे कांग्रेस के टिकट से विधायक बनीं तो उन्हें भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के मंत्रिमंडल में शहरी विकास व आवास मंत्री बनाया गया है।

फिलहाल वे हिसार विधान सभा सीट से विधायक हैं। जिंदल समूह की तरह राजनीति में उनकी भूमिका निष्क्रिय नहीं है। वे अपने क्षेत्र की जनता के हर दुख-दर्द में शामिल होती हैं। उनका सीधा संवाद है अपने क्षेत्र की जनता से। अपने क्षेत्र में गरीब लड़कियों के उत्थान और उनकी शिक्षा में विशेष योगदान देती हैं। राजनीति और व्यापार की व्यस्तताओं के बीच भी वे कुनबे को संभालने के लिए भी वक्त निकाल लेती हैं। आज के समय में टूटते संयुक्त परिवारों के दौर में सावित्री जिंदल ने अपने दसों बेटे-बेटियों को प्यार के बंधन में बांध रखा है। 

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