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उल्टी पड़ी चाल, मुसलमानों ने खारिज की मुलायम की टिप्पणी

उल्टी पड़ी चाल, मुसलमानों ने खारिज की मुलायम की टिप्पणी

अयोध्या मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की सीधी आलोचना मुसलमानों को पसंद नहीं आयी है। अधिकांश मुस्लिम नेताओं की राय है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी को संयम बरतना चाहिए और किसी को भी ऐसी कोई बयानबाजी नहीं करनी चाहिए, जो राजनीति से प्रेरित लगती हो और जिससे माहौल के बिगड़ने की आशंका हो।

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य और ईदगाह के नायब इमाम मौलाना रशीद फिरंगी महली ने कहा कि पूरे देश में दोनों समुदायों के धार्मिक नेताओं, राजनेताओं और मीडिया ने इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी जिम्मेदारी और संयम का परिचय दिया है। यह रुख आगे भी बना रहना चाहिए और किसी को भी ऐसी कोई टिप्पणी नही करनी चाहिए, जो राजनीति से प्रेरित लगती हो और जिससे साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका हो।

फिरंगी महली ने कहा कि संघ परिवार से लेकर सभी ने अब तक परिपक्वता का परिचय दिया है और यह संयम पूर्ण व्यवहार आगे भी बना रहना चाहिए और ऐसी कोई बयानबाजी नही होनी चाहिए, जिससे फिरकापरस्त ताकतों को हरकत में आने का मौका मिलता हो। यह कहते हुए कि हालांकि हाईकोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय के लोगों में मायूसी का भाव है, फिरंगी महली ने जोर देते हुए कहा कि देश के व्यापक हित को देखते हुए हर एक को संयम बरतना चाहिए और ऐसी प्रतिक्रिया से बचना चाहिए, जिससे साम्प्रदायिक सौहार्द और अमन में खलल पड़ने की आशंका हो।

फिरंगी महली की ही तरह इस्लामी शोध संस्थान दारूल मुसिन्नफीन के मौलाना मोहम्मद उमर ने कहा कि हालांकि मुलायम मुस्लिम समुदाय की भावनाओं की ही बात कही है। मगर टिप्पणी करने के लिए यह समय उचित नहीं है।

उधर शिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद मिर्जा अतहर ने कहा कि ऐसे समय जब हर आदमी समाज में अमन और शांति बनाये रखने की कोशिश में है और मुलायम सिंह यादव जैसे बड़े नेता की तरफ से आये इस तरह के बयान से आश्चर्य होता है।

उन्होंने कहा कि किसी भी अदालती मामले में एक पक्ष जीतता है, दूसरा हारता है और जब हाईकोर्ट के निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का रास्ता खुला है और विवाद को आपसी सहमति से सुलझा लेने का विकल्प भी सामने है तो इस तरह की टिप्पणी गैर जरूरी लगती है। मौलाना अतहर ने कहा कि कोई राजनेता अपने राजनीतिक हित साधने के लिए टिप्पणी करे यह स्वाभाविक है। मगर ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर जिसमें दो समुदाय आमने सामने हो व्यापक राष्ट्रहित में ऐसी बयानबाजी से बचा जाना चाहिए।

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के एक अन्य सदस्य एवं प्रतिष्ठित शिया उलेमा मौलाना हमीदुल हसन ने यादव के बयान पर कोई टिप्पणी करने से इंकार किया है। हालांकि, उन्होंने भी कहा कि सभी को संयम का परिचय देना चाहिए और ऐसी किसी भी बयानबाजी से बचना चाहिए, जिससे साम्प्रदायिक एकता खंडित होने की आशंका हो। आल इंडिया सुन्नी बोर्ड के मौलाना मोहम्मद मुश्ताक ने कहा है कि अपने वादों और अपीलों का मान रखते हुए किसी भी मुस्लिम नेता ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है, जिससे माहौल बिगड़े और जुमे की नमाज के बाद भी यह अपील फिर दोहरायी गयी है कि आपसी शांति और सौहार्द बनाये रखने में सबको सहयोग देना है।

गौरतलब है कि कल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने एक बयान जारी करके कहा था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में आस्था को कानून तथा सुबूतों से ऊपर रखा है और देश का मुसलमान इस निर्णय से खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है।

इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को मांग की कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगें।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय कटियार ने फैजाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि उनकी (यादव) टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें देश के लोगों खासकर अयोध्या के निवासियों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ''पवित्र अयोध्या के निवासियों की ओर से मैं मांग करता हूं कि मुलायम सिंह रामलला के सामने माथा टेकें और माफी मांगें।

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