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मिलेंगे बेहतर खेल प्रबंधक, पाठ्यक्रमों की मांग बढ़ने की उम्मीद

भारत में राष्ट्रमंडल खेलों जैसे वैश्विक प्रतिस्पर्धाओं के आयोजन से देश में खेल प्रबंधन से जुड़े पेशवरों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। भारतीय प्रबंधन संस्थान-शिलांग (आईआईएम-एस) के परिसर में नियुक्तियों को लेकर छात्रों में देखा जा रहा उत्साह भी इसकी ओर संकेत देता है।

प्रबंधन संस्थानों में आईआईएम-एस एक ऐसा संस्थान है, जो खेल से जुड़ा एक अलग तरह का पाठ्यक्रम चला रहा है। संस्थान को नियुक्तियों और साक्षात्कारों के लिए पहले से ही सिफारिशें भेजी जाने लगी हैं।

आईआईएम-एस के निदेशक अशोक केदत्ता ने एक साक्षात्कार के दौरान बताया कि संगठनात्मक लक्ष्यों को हासिल करने और उसके विकास के मद्देनजर आवश्यक खेल प्रबंधन की अवधारणा के साथ इस पाठ्यक्रम को शुरू किया गया है।

उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसी खेल प्रतिस्पर्धाएं, जहां टिकटों की बिक्री बडे़ पैमान पर होती हैं। उसके लिए पेशेवर प्रबंधकों की बेहद जरूरत है।

एक हद तक राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन परेशानी पैदा करने वाला रहा है। यह आश्चर्य करने वाली बात नहीं हैं खेल आयोजन समिति को विदेशी विशेषज्ञों से सेवाएं लेनी पड़ी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेलों ने उच्च दृश्यता और इससे जुड़े मनोरंजन मुहैया कराने के लिए संगठनात्मक और विपणन के क्षेत्र में अवसर पैदा किए हैं। साथ ही खेल से जुड़े विज्ञापन व सामान, आयोजन स्थलों, खिलाड़ियों के विज्ञापन, निर्माण, प्रतिस्पर्धा प्रबंधन, विपणन सेवा, प्रायोजक, टिकटों की बिक्री, प्रसारण अधिकार को लेकर तमाम तरह के कामों के लिए पेशेवरों की जरूरत पड़ती है।

एक अनुमान के मुताबिक एशिया प्रशांत में खेल से जुड़े बाजार में इस साल 22 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। पिछले साल यह 15 प्रतिशत थी। वर्ष 2009 में इस क्षेत्र में 25 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था।

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