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अयोध्या फैसलाः माहौल ठंडा, सियासत गर्म

अयोध्या फैसलाः माहौल ठंडा, सियासत गर्म

अयोध्या प्रकरण पर हाईकोर्ट के फैसले के एक दिन बाद तक आम हिंदू व मुस्लिम की ओर से किसी तरह की उत्तेजक प्रतिक्रिया न होने के बावजूद सांप्रदायिक राजनीति के सूरमाओं ने लगता है, उम्मीद नहीं छोड़ी है। करीब दो दशक पहले यूपी की राजनीति बदलने वाले अयोध्या मुद्दे पर फैसले के बाद भाजपा और समाजवादी पार्टी मान रही हैं कि यह मसला अभी भी उनके लिए वोट हासिल करने का माध्यम बन सकता है।

फैसले के एक दिन बाद मुलायम सिंह ने कहा है कि इस फैसले से देश का मुसलमान ठगा सा महसूस कर रहा है। 1990 के बयान की याद दिलाते हुए तब  उन्होंने संविधान और कानून की रक्षा के लिए टस से मस हुए बिना कर्तव्य का पालन किया। माना जा रहा है कि प्रदेश में काफी जनाधार गंवा चुकी सपा व भाजपा इस फैसले में फिर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का मौका देख रही हैं।

पिछले चुनाव में दलित, मुस्लिम व ब्राह्मण समुदाय के गठजोड़ से सत्ता में आने वाली बसपा किसी एक समुदाय का पक्ष लेने का जोखिम नहीं उठा सकती। यही स्थिति कांग्रेस के साथ है जिसे पिछले एक-दो वर्षो में इन्हीं वर्गो से समर्थन मिलने की उम्मीद बनी है। यह फैसला मुस्लिम व हिंदू वोटर को कितना प्रभावित करेगा यह आने वाले दिनों में पता चलेगा, लेकिन सपा व भाजपा के पास उत्तर प्रदेश में जनाधार वापस पाने के लिए और कोई विकल्प भी नहीं हैं।

राजधानी में संघ के प्रमुख पदाधिकारियों ने आपसी बातचीत में यह कहना शुरू कर दिया है कि बाकी फैसला चाहे तथ्यों पर आधारित था, लेकिन जमीन तीन हिस्सों में बांटने संबंधी निर्देश पूरी तरह राजनीतिक है। फिलहाल सार्वजनिक तौर पर संयम बरत रहे संघ नेताओं की ओर से संकेत हैं कि वह पूरी जमीन के लिए आंदोलन शुरू करने में देर नहीं करेंगे। फिलहाल भाजपा नेता बिहार में अपनी रणनीति में किसी तरह के बदलाव से इनकार कर रहे हैं।

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