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बलिया के मुरली बाबू के नाम के साथ छेड़छाड़!

‘शेरे बलिया’ चित्तू पांडेय के साथ स्वास्थ्य विभाग की छेड़छाड़ का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब बलिया के मालवीय कहे जाने वाले ‘मुरली बाबू’ के नाम के साथ भी छेड़छाड़ का एक मामला प्रकाश में आया है। यह छेड़खानी की है महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने। विश्वविद्यालय से सम्बद्ध शहर के टीडी कालेज के छात्र-छात्रओं को जो अंक पत्र मिला है उस पर मुरली मनोहर के नाम के पहले का श्री गायब है, जबकि मुरली को भी मुराली बना दिया गया है। इस बात का खुलासा खुद कालेज के ही एक अध्यापक व जनपद महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डा. बृजेश कुमार सिंह त्यागी ने किया है। यही नहीं उक्त अध्यापक ने विश्वविद्यालय पर अन्य कई मामलों में भी अनियमितता की शिकायत की है।


नमूना के तौर पर डा. सिंह ने कालेज की एक छात्र एकता द्विवेदी का अंकपत्र दिखाया। इसमें छात्र के पिता का नाम ब्रज बिहारी द्विवेदी के स्थान पर बज बिटारी द्विवेदी लिखा है, जबकि कालेज का नाम लिखा है ‘मुराली मनोहर टाउन पीजी कालेज बलिया।’ डा. सिंह के अनुसार पहले के अंकपत्रों में नाम के पहले ‘श्री’ लगा है। पहले के अंकपत्रों में मुरली की स्पेलिंग में ‘एम यू आर एल आई’ लिखा है जबकि विद्यापीठ की ओर से उपलब्ध कराये गये अंकपत्र में ‘एम यू आर ए एल आई’ लिखा गया है।
इतना ही नहीं डा. सिंह के अनुसार विश्वविद्यालय ने परीक्षाओं के दौरान चेकिंग दल की तैनाती व उत्तरपुस्तिकाओं की जांच के लिए परीक्षकों की नियुक्ति में भी अनियमितता बरती है। उनके अनुसार परीक्षा के संचालन के लिए पर्यवेक्षक, उड़ाका दल के संयोजक या सदस्य के रूप में महाविद्यालयीय अनुभवी शिक्षकों को न नियुक्त कर विश्वविद्यालय परिसर के ऐसे आवास शिक्षकों को नियुक्त किया गया जो दूरस्थ कस्बों व गांवों में स्थित महाविद्यालयों से न तो परिचित थे और न ही उन्हें कोई अनुभव था। इसके चलते जिला मुख्यालय पर स्थित कुछ महाविद्यालयों में ही मात्र एक-दो बार आकर कागजी खानापूर्ति कर दी। डा. त्यागी की मानें तो उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए परीक्षकों की नियुक्ति में भी विवि ने गड़बड़ी की है।
इनसेट
कैसे चलेंगी 180 दिन कक्षाएं?
बलिया। जनपद महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डा. बृजेश कुमार सिंह त्यागी ने कहा है कि अबतक स्नातक प्रथम वर्ष का परीक्षा परिणाम भी घोषित नहीं किया गया है। यूजीसी ने एक सत्र में कम से कम 180 दिन कक्षाएं चलाने का निर्देश दिया है। सत्ररम्भ से 90 दिन बीत चुके हैं और परिणाम घोषित नहीं हो सका है। ऐसे में यूजीसी के मानक का विश्वविद्यालय प्रशासन में ही उल्लंघन किया जा रहा है। एमए प्रथम वर्ष में भी जो परिणाम घोषित किया गया है उनमें अधिसंख्य छात्रों को गलत अंकपत्र जारी कर दिया गया है। डा. सिंह ने जिले के सभी कालेजों को फिर से पूर्वाचल विश्वविद्यालय जाैनपुर से सम्बद्ध करने की मांग की है।

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