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भारतीय धर्मनिरपेक्षता बची

छह दशकों के लंबे इंतजार के बाद भारतीय न्यायपालिका ने बाबरी मस्जिद-रामजान्म भूमि विवाद पर फैसला सुनाकर यह प्रमाणित करने की कोशिश की है कि देश का धर्मनिरपेक्ष चेहरा अभी भी बरकरार है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के दो हिंदू और एक मुस्लिम जज ने निष्पक्ष होने का प्रयास करते हुए एक ऐसा फैसला दिया है, जो अपने को राजनीतिक, धार्मिक और कानूनी होने की कसौटी पर खरा उतारना चाहता है। सरकार ने इस फैसले को धैर्य के साथ स्वीकार करने और अमन बनाए रखने की अपील की है। आज रिटायर होने वाले बेंच के एक जज के लिए यह उनके जीवन का सबसे अहम फैसला है। यह फैसला हालांकि महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे कोई क्रांतिकारी नहीं कहा जा सकता। यह फैसला तीन हिस्सों में बंटा हुआ है, जो कहता है कि विवादित जमीन के तीन टुकड़े किए जाने चाहिए जिसमें एक हिस्सा हिंदू, एक मुस्लिम और तीसरा निर्मोही अखाड़े को जाना चाहिए।   
गल्फ न्यूज, दुबई

गलत रास्ते पर आयरलैंड
यूरोप की अपनी यूनानी त्रासदी है। लगता है कि यह महाद्वीप आयरलैंड की त्रासदी से गुजर रहा है। दो साल पहले मंदी की चपेट में आने के बाद आयरलैंड ने अब बाहरी लोगों के सुझाए रास्ते पर चलना शुरू कर दिया है। जब प्रॉपर्टी सेक्टर को दिए गए बैंकों के कर्ज डूबने लगे तो राज्य ने तुरंत अपने बड़े बैंकों की गारंटी दे दी। आने वाले महीनों में सरकार ने बांड मार्केट को भरोसे में लेने के लिए सरकारी खर्च में भारी कटौती की है। उसका इरादा यह जाहिर करना है कि आयरलैंड अपने सरकारी खर्च को कम करने के लिए गंभीर है। आयरलैंड की जनता ने सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय मितव्ययिता की इस जरूरत को स्वीकार कर लिया है। अगर यूनान यूरोप का अविश्वसनीय सदस्य है तो आयरलैंड एक आदर्श शिष्य है।   
द इंडिपेंडेंट, लंदन

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