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8 अक्टूबर (शुक्रवार) से शुरूः शारदीय नवरात्र

नवरात्र मुख्य रूप से दो होते हैं-वासन्तिक और शारदीय। वासन्तिक नवरात्र में भगवान विष्णुजी की पूजा की जाती है तथा शारदीय में शक्ति की पूजा करते हैं। शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक होते हैं। व्रती प्रतिपदा से नवमी तक व्रत करते हैं। कुछ व्यक्ति तो अन्न त्याग देते हैं। कुछ एक भूक्त रहकर भगवती की उपासना करते हैं।

इस दिन पवित्र जगह की मिट्टी से वेदी बनाकर उसमें जौ, गेहूं बोये जाते हैं। इस पर सोने, तांबा,चांदी या मिट्टी का कलश रखते है। इन के साथ स्वातिक, त्रिशूल बनाकर दुर्गाजी का चित्र, पुस्तक तथा शालग्राम को रखकर पूजा करते हैं। 

नवरात्र व्रत को प्रारम्भ में स्वातिवाचन-शान्तिपाठ करके संकल्प करें और तब सब से पहले गणेश जी की पूजा कर मातृका, लोकपाल, नवग्रह एवं वरुण आदि का पूजन करते हैं। दुर्गा देवी की आराधना अनुष्ठान में भद्राकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन तथा मार्कण्डेय पुराणान्तर्गत निहित श्री दुर्गासप्तशती का पाठ करते हैं।

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।
नम: प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणता: स्मताम।
इस मंत्र से पुस्तक का पंचोपचार पूजन कर यथाविधि पाठ करें।

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