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पति के जीवित रहते दिवंगत हो गई स्त्री के लिए

पितृपक्ष की नवमी तिथि मृत सधवा स्त्री के लिए नियत की गई है। पति के जीवित रहते जिस स्त्री का निधन होता है, उसे ‘अहेव’ कहा जाता है। मरने के बाद उसकी गिनती ‘सधवा’ में ही होती है।

कालांतर में जब उसके पति का देहांत होता है, तब भी वह सधवा रहती है। अत: उसके पति यानी श्रद्धकर्ता का निधन होने पर पितृपक्ष की अविधवा नवमी का श्रद्ध उसके पुत्र जारी रखें।

यदि श्राद्धकर्ता पुत्र का देहांत हो जाए तो उसके बच्चे पितामही अविधवा नवमी का श्राद्ध न करें। यदि सौतेली मां जीवित हो और सगी मां का निधन हो जाए या सगी मां जीवित हो तथा सौतेली मां का निधन हो जाए तो भी पुत्र को यह श्राद्ध करना चाहिए।

यदि एक से अधिक माता का देहांत सधवा स्थिति में हुआ हो तो उन माताओं का श्राद्ध अविधवा नवमी को एकतंत्रीय पद्धति से करना चाहिए। ऐसे समय भोजन के लिए उतनी ही संख्या में सुहासिनियों को आमंत्रित करें। लड़का न होने पर अविधवा नवमी का श्राद्ध पुत्री या जमाई नहीं कर सकते।
(‘मनोज पब्लिकेशन्स’ के सौजन्य से)

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