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गांधी की प्रार्थना सभा में गड़बड़ी पैदा की थी गोडसे ने

महात्मा गांधी की 30 जनवरी 1948 को हत्या करने से दो-तीन वर्ष पहले से नाथूराम गोडसे इसकी साजिश रच रहा था। हत्या से डेढ़ वर्ष पहले गोडसे ने बापू को उपहार स्वरूप एक टोकरे जूते भेजे थे और उनकी प्रार्थनासभा में गड़बड़ी पैदा की थी।

महात्मा गांधी की परनातिन नीलम पारिख ने बापू के पत्रों पर आधारित पुस्तक संकलन में इस बात का खुलासा किया है। दक्षिण अफ्रीका के सुप्रसिद्ध लेखक चंद्रकांत बक्शी और बापू की चिकित्सा सेवा में संलग्न सुशीला बहन के बीच संवाद का उल्लेख करते हुए पुस्तक में कहा गया है कि गांधीजी की हत्या से डेढ़ साल पहले सुशीला बहन की मुलाकात गोडसे से हुई थी। बापू उन दिनों पूना में थे और यहीं सुशीला ने गोडसे को देखा था।

सुशीला बहन ने कहा कि गोडसे उन दिनों पूना में डॉक्टर दिनशा से परामर्श लेने आया हुआ था। वह एक टोकरी लेकर आया था। उसने कहा कि यह फलों की टोकरी है और बापू के लिए उपहार के रूप में लाई गई है।

गोडसे के जाने के बाद गांधीजी के एक रिश्तेदार कनु गांधी ने वह टोकरी खोली और उन्होंने पाया कि उसमें फल नहीं बल्कि जूतों से भरी हुई थी।

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