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मंदिर के अवशेष से बनी थी बाबरी मस्जिद : न्यायाधीश

मंदिर के अवशेष से बनी थी बाबरी मस्जिद : न्यायाधीश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के न्यायाधीश धरम वीर शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि ध्वस्त मंदिर के अवशेषों का इस्तेमाल बाबरी मस्जिद के निर्माण में किया गया। इस कथन के समर्थन में उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा मुहैया कराए गए प्रमाणों का हवाला दिया।

न्यायमूर्ति शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य, ऐतिहासिक साक्ष्य, गजेटियर 361 और अन्य पुरालेख दस्तावेजों के आधार पर यह यह स्थापित हो गया है कि मंदिर को ध्वस्त करने के बाद विवादित ढांचा बतौर मस्जिद खड़ा किया गया। पुराने मंदिर के स्तंभ भी दोबारा इस्तेमाल किए गये जिन पर इस्लाम के सिद्धांत के विपरीत देवी-देवताओं की तस्वीरें हैं।

उन्होंने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य मुसलमानों के दावे के पूरी तरह विरोधाभासी हैं। मैंने पहले ही मौखिक साक्ष्य का उल्लेख किया है जो अनुसूची पांच में पक्षकारों द्वारा दर्ज कराए गए थे। मेरा निष्कर्ष है कि मुसलमानों के मौखिक साक्ष्य भरोसे के लायक नहीं हैं। इस प्रकार परिस्थितिजन्य साक्ष्य निष्कर्षत: पुराने मंदिर को तोड़े जाने के बारे में हिंदुओं के दावे को स्थापित करता है जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सबूत से भी सिद्ध होते हैं।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि विशेषज्ञों के विचार, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और ऐतिहासिक साक्ष्य सभी या किसी भी दृष्टिकोण से यह बतलाते हैं कि बाबर के कहने पर मीर बकी ने मंदिर को ध्वस्त किया था और उस स्थान पर मस्जिद बनाई थी।

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  • Web Title:मंदिर के अवशेष से बनी थी बाबरी मस्जिद : न्यायाधीश