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दूसरे देशों में भी हुई देरी, अनियमितताएं और आलोचना

दूसरे देशों में भी हुई देरी, अनियमितताएं और आलोचना

ऐसा पहली बार नहीं हैं जब राष्ट्रमंडल खेल के आयोजकों को विवादों की वजह से आलोचनाओं से दो चार होना पड़ा है। अतीत में भी कई बार ऐसे मौके आए हैं जब बड़े खेलों का आयोजन करने वाले देशों को परेशानियां झेलनी पड़ी।

स्काटलैंड सहित जो देश इस समय दिल्ली पर इन खेलों के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होने के आरोप मढ़ रहे हैं, वे भी खस्ता यातायात व्यवस्था, धीमी तैयारी, वित्तीय अनियमितताएं और राजनीतिक बहिष्कार जैसे विवाद झेल चुके हैं।

इसका सबसे ताजा उदाहरण फीफा विश्व कप 2010 का अयोजन करने वाला दक्षिण अफ्रीका है। फीफा के अधिकारियों ने वहां स्टेडियम समय से नहीं बनने को लेकर चिंता जताई थी।

इसके अलावा यहां सुरक्षा, टिकट बिक्री और यातायात मामले में विवादों में रहे। लेकिन आखिरकार अफ्रीका महाद्वीप में पहली बार शानदार विश्व कप का आयोजन हुआ।

इसी साल फरवरी में वेंकूवर (कनाडा) में हुए दिल्ली की तरह ही शीत ओलंपिक की तैयारियां आलोचनाओं का शिकार हुईं। वर्ष 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक में चीन की राजधानी में वायु की खराब गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का केन्द्र बनी।

आईओसी के अध्यक्ष जैकस रोगे ने कुछ स्पर्धाओं को रद्द करने की सलाह दी लेकिन चीन ने शानदार ओलंपिक का आयोजन किया। वर्ष 2004 में एथेंस ओलंपिक खेलों में कई आधारभूत ढांचों के निर्माण में देरी हुई।

इसके अलावा सिडनी ओलंपिक 2000, अटलांटा ओलंपिक 1996 जैसे बड़े खेल आयोजन तमाम विवादों के बावजूद सफल रहे। वर्ष 1986 का एडिनबर्ग राष्ट्रमंडल खेल राजनीतिक बहिष्कार और वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से चर्चित रहा।

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