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शक्ति की उपासना का पर्व है नवरात्र

शक्ति की उपासना का पर्व है नवरात्र

हिन्दू संस्कृति एवं धर्म में ‘शारदीय नवरात्र’ का विशेष धार्मिक महत्त्व है। अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रथम रात्रि से ही नौ दिनों तक चलने वाले ‘नवरात्रों’ में कलश स्थापना के साथ ही, आद्य शक्ति के नौ रूपों की पूजा एवं आराधना का सिलसिला आरम्भ हो जाता है। इस अवसर पर देश के समस्त देवी के मंदिरों में विशेष सजावट तथा प्रतिमाओं का विशेष श्रृंगार किया जाता है तथा नौ दिनों तक चलने वाली पूजा- अजर्ना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। पश्चिमी बंगाल में नवरात्रों को दुर्गा पूजा के रूप में बड़ी श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाता है। राज्य के प्रत्येक शहर के मुख्य स्थानों के भव्य पंडालों में सुसज्जित मां दुर्गा का दर्शन करने तथा इस अवसर पर प्रतिदिन सायंकालीन सांस्कृतिक एवं भक्तिपूर्ण कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। अंतिम दिन गाते-बजाते तथा मां की जय जय कार करते देवी दुर्गा की प्रतिमाओं को नदियों में विसजिर्त करने की परम्परा है।

इस अवसर पर देश के प्रमुख मंदिरों में लगने वाले मेलों की बात करें तो छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर शहर से 25 किलोमीटर दूर रतनपुर महामाया मंदिर (शक्तिपीठ) के परिसर में हर वर्ष नवरात्रों के अवसर पर आयोजित होने वाला मेला एक खास महत्त्व रखता है, जहां काफी दूर-दूर से स्थानीय आदिवासी एकत्रित होकर मेले का आनंद उठाते हैं। कल्चूरिया वंश की राजधानी रह चुके रतनपुर नगर को छत्तीसगढ़ की पहली राजधानी होने का भी गौरव प्राप्त है। यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में महामाया मंदिर, प्राचीन मंदिरों के अवशेष, राम मंदिर, हाथी किला के भग्नावशेष खंडोवा मंदिर, महाकाली मंदिर, खूंटा घाट बांध के अलावा श्री काल भैरों मंदिर तांत्रिक सेंटर के रूप में प्रसिद्ध हैं। इन सभी पुरातत्वीय और धार्मिक महत्व के स्थानों को देखने पर्यटक खिंचे चले जाते हैं।

नवरात्रि उत्सव गुजरात का प्रमुख त्योहार है। नवरात्रों के अवसर पर पूरा गुजरात झूम उठता है। नवरात्रों से एक महीना पहले ही इस उत्सव को मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस अवसर पर ‘चनियां-चोली, टाई एण्ड डाई, एम्ब्रॉयडरी तथा आकर्षक प्रिंट वाली ड्रेसेज तैयार की जाती हैं और पारम्परिक परिधानों के साथ मैच करते गहनों एवं मेकअप के लिए महिलाओं का क्रेज देखते ही बनता है। महिलाओं के साथ पुरुष भी सजने-संवरने पर खास ध्यान देते हैं। नवरात्रों में यहां के लोक नृत्य गरबा तथा डांडिया रास में हिस्सा लेने वालों की होड़ लग जाती है। गुजरात के प्रसिद्ध अम्बाजी के मंदिर तथा वडोदरा के निकट पावागढ़ स्थित कालिका माता के मंदिर के प्रांगण में हजारों की संख्या में नृत्य कर भक्त मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

कैसे पहुंचें

रतनपुर (छत्तीसगढ़)-निकटतम हवाई अड्डा रायपुर 141 किलोमीटर दूर है तथा दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता आदि शहरों से हवाई मार्ग से जुड़ा है। निकटतम रेलवे स्टेशन बिलासपुर है, जो हावड़ा-मुम्बई मेन लाइन से जुड़ा है। यहां से रतनपुर 25 किलोमीटर है। बिलासपुर से बस अथवा टैक्सी की सेवा ली जा सकती है। अहमदाबाद, वडोदरा तथा सूरत शहर वायु, रेल तथा सड़क मार्ग से जुड़े हुए हैं। ठहरने के लिए सभी प्रकार के पांच सितारा होटल से लेकर बजट होटल तक उपलब्ध हैं।

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