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फैसला सुनायेंगे स्पीकर?

राज्य के यूपीए के घटक दलों को अभी भी सरकार बनने की उम्मीद है। ऐसे में दल-बदल मामले पर स्पीकर का फैसला काफी महत्वपूर्ण हो गया है। दसवीं अनुसूची के 11 मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। स्पीकर पहले कह चुके हैं कि बजट सत्र से पहले फैसला सुना देंगे। सत्र नहीं होने पर मार्च में फैसला सुनाने की बात कह रहे हैं। झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू है। विधानसभा को निलंबित रखा गया है। सरकार नहीं बनने की स्थिति में विधानसभा भंग हो जायेगी। तब सभी मामले स्वत: समाप्त हो जायेंगे। फैसले के संबंध में स्पीकर आलमगीर आलम ने कहा कि अभी अध्ययन कर रहे हैं। कानूनी मामलों में फैसला लेने में तो विलंब होता ही है।ड्ढr स्पीकर कोर्ट में भाजपा के निलंबित विधायक प्रदीप यादव, रवीन्द्र राय, विष्णु भैया, मनोहर टेकरीवाल एवं कुंती देवी, आजसू के सुदेश महतो, झाजपा के बंधु तिर्की, राकांपा के कमलेश सिंह, झापा के एनोस एक्का, फाब्ला के भानु प्रताप शाही तथा निर्दलीय स्टीफन मरांडी के खिलाफ दल-बदल के मामले लंबित हैं। इनमें भाजपा और आजसू को छोड़कर बाकी सभी विधायक यूपीए सरकार में मंत्री रह चुके हैं। विष्णु भैया विधायकी से इस्तीफा दे चुके हैं। झारखंड में यूपीए की सरकार बनाने की कवायद अभी भी जारी है। ऐसी स्थिति में यदि संविधान की दसवीं अनुसूची का दुरुपयोग होता है तो स्पीकर पर उंगली उठेगी ही। सुनवाई पूरी होने के बाद स्पीकर अब ज्यादा दिनों तक मामले को नहीं लटका कर रख सकते हैं। याद रहे कि 2006 में जब एनडीए सरकार गिर रही थी, तब तत्कालीन स्पीकर इंदर सिंह नामधारी के कोर्ट में स्टीफन मरांडी, एनोस एक्का व कमलेश कुमार सिंह मामले सुनवाई के लिए लंबित थे। उन पर सुनवाई पूरी हो चुकी थी। फैसला देने का दबाव था। लेकिन अंतिम समय में उन्होंने फैसला टाल दिया था। इसके बाद एनडीए सरकार गिर गयी थी। अब देखना है कि स्पीकर अपने संवैधानिक दायित्व के निर्वहन में कितनी सतर्कता बरत रहे हैं।

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