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भाईचारा और एकता के हिमायती रहे अंसारी

प्रथम विश्वयुद्ध की विभीषिका झेल रहा समाज जब तोप और गोलों के बारूदी धुंए से आप्लावित होकर चीत्कार रहा था, ठीक उसी वक्त रांची के छोटे से गांव इरबा में असद अली के परिवार में बालक अब्दुर्रज्जाक ने जन्म लिया। अब्दुर्रज्जाक ने अभावों के बीच समाज में विकास का ऐसा परचम लहराया।ड्ढr बचपन में बालक अब्दुर्रज्जाक अपने गांव से 35 किलोमीटर दूर रांची में आकर अपने बुने कपड़े बेचा करते थे। यहीं खान बहादुर हबीबुर्रहमान द्वारा खोले गये स्कूल में उनकी बुनियादी शिक्षा हुई। पैसे के अभाव में वह स्कूल में खाना बनाने की प्रक्रिया में मदद किया करते थे। इसी समय पंडित जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद के सपनों को साकार करने के लिए विख्यात प्रगतिशील लेखक सुहैल अजीमाबादी ने उर्दू मरका की स्थापना की। उनसे प्रभावित होकर अबदुर्रज्जाक स्वतंत्रता संग्राम और कांग्रेस की गतिविधियों में भाग लेने लगे। उन्होंने 1में अपने गुरु अब्दुल कयूम अंसारी के नाम से इरबा में स्कूल खोला। फिर ओरमांझी में एक हाई स्कूल की स्थापना की। लोगों को रोगार से जोड़ने के लिए श्री अंसारी ने बुनकर सहकारिता समिति की नींव डाली। उनके प्रयास से छोटानागपुर में रिानल हैंडलूम वीवर्स कोऑपरटिव यूनियन लिमिटेड की स्थापना हुई। शिक्षा और रोगार के बाद उन्होंने स्वास्थ्य की कसौटी पर खरा उतरने का वायदा समाज से किया। दुर्भाग्य रहा कि जिस दिन अस्पताल की आधारशिला रखने के लिए वे राज्यपाल से मिलने गये थे, उसी दिन पटना से रांची लौटते वक्त वह चल बसे। उन्हें न तो वक्त पर दवाइयां मिल सकीं, न ही कोई डॉक्टर। इस घटना ने बुनकर समिति को झकझोर कर रख दिया। तब समिति ने अब्दुर्रजाक अंसारी वीवर्स हॉस्पीटल की स्थापना का संकल्प लिया, जिसे पूरा किया स्व. अंसारी के पुत्र सईद अहमद अंसारी और मंजूर अहमद अंसारी ने। सात अप्रैल, 1ो अपोलो प्रबंधन के साथ जुड़कर एक उच्च स्तरीय केयर हॉस्पीटल की नींव पड़ी। अब्दुर्रजाक अंसारी अंत समय तक लोगों को भाईचार और एकता का संदेश देते रहे।

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  • Web Title: भाईचारा और एकता के हिमायती रहे अंसारी