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सेक्स वर्कर से लेखिका बनने तक की दास्तां

जयपुर लिटरचर फेस्टिवल में श्रोताओं ने नलिनी जमीला से एक सेक्स वर्कर से लेखिका बनने तक के उनके सफर की दास्तां सुनी। ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए सेक्स वर्कर नाम से मलयाली से अंग्रेजी में अनूदित नलिनी की इस आत्मकथा ने केरल में हंगामा बरपा दिया था। बहरहाल उनकी आपबीती में समाज के दोहर चरित्र के बार में कड़वी सच्चाई थी, दर्द था लेकिन एक उम्मीद भी बंधी कि नलिनी ने एक ऐसे पेशे में रह कर, जिसे सभ्य समाज घृणा की हद तक नापसंद करता है, एक सामाजिक कार्यकत्त्रा और लेखिका के रूप में उसी समाज से मान्यता भी पाई है। लेकिन नलिनी की कहानी केवल उसके सफल संघर्ष की दास्तान ही नहीं है बल्कि यह भारत में प्रगति और विकास के उस मुखौटे को नोच फें कती है, जिसे हम खुशफहमी में अपना आदर्श मानते हैं। यह बात केरल की है, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रगतिशील विचारों वाला प्रदेश कहा जाता है। नलिनी को अपने पति की मौत के बाद वेश्यावृत्ति में उतरना पड़ा ताकि परिवार को पालने के लिये पांच रुपये प्रति दिन कमा सके क्योंकि मेहनत करके वह सिर्फ ढाई रुपये कमा पाती थी। नलिनी बताती हैं कि इसी केरल में आज भी ऐसे इलाके हैं जहां महिलाएं शाम ढले नहीं निकलतीं बल्कि कामकाजी महिलाएं बस या रलवे स्टेशन तक जाने के लिये सेक्स वर्कर का साथ ढूंढती हैं। उस वक्त 24 साल की नलिनी 50 रु. प्रतिदिन कमाने के लिये दुनिया के सबसे पुराने व्यापार में उतरीं ताकि बच्चों को अनाथालय ना भेजना पड़े। उनका पहला ग्राहक पुलिस अफसर था। पर नलिनी को इसका दु:ख नहीं हुआ क्योंकि जिस प्यार भर शारीरिक सम्बन्ध की चाहत उन्हें अपने पति से थी वह पहली बार एक अजनबी से मिला।

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