DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

गरीबों के अनाज में कटौती का खतरा

राज्यकर्मियों की हड़ताल से गरीबों के अनाज में कटौती का खतरा पैदा हो गया है। जन वितरण प्रणाली के तहत पिछले वर्ष मिले गेहूं और चावल का एक दर्जन से अधिक जिलों ने उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया है। हड़ताल की वजह से रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकी है। अब अगर ब्योरा नहीं मिला तो केन्द्र सरकार गरीबी रखा से नीचे के लोगों के लिए भेजे गये अनाज में कमी कर सकती है।ड्ढr ड्ढr खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने जिला आपूर्ति पदाधिकारियों (डीएसओ) को चेतावनी दी है कि अगर कटौती हुई तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अनाज के उठाव और वितरण की समीक्षा के दौरान पता चला कि बीस जिलों से ही वर्ष 2007-08 की रिपोर्ट मिल सकी है। बेगूसराय, मधेपुरा, लखीसराय, सारण, शिवहर, जहानाबाद, नालंदा, सुपौल, सहरसा, गया, समस्तीपुर, लखीसराय और भोजपुर समेत कई जिलों से माहवार रिपोर्ट नहीं मिली है। कई जिलों ने जानकारी दी है कि हड़ताल की वजह से रिपोर्ट तैयार करने में परशानी हो रही है।ड्ढr ड्ढr हालांकि विभाग ने सभी डीएसओ को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है। दरअसल बिहार केन्द्र को अनाज का ब्योरा भेजने में फिसड्डी रहा है। काफी डांट-डपट के बाद जिलों से वर्ष 2001-02 से 2006-07 तक की रिपोर्ट मिली। अब इस मुहिम पर हड़ताल भारी पड़ गयी है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: गरीबों के अनाज में कटौती का खतरा