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सज्जन को कोर्ट ने दिया झटका, सुनवाई जारी रहेगी

सज्जन को कोर्ट ने दिया झटका, सुनवाई जारी रहेगी

सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार के खिलाफ हत्या और दूसरे अपराधों के आरोप रद्द करने से सोमवार को इंकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि सज्जन के खिलाफ सिख विरोधी दंगा मामले में मुकदमा जारी रहेगा।

न्यायमूर्ति ए सदाशिवम और न्यायमूर्ति एआर दवे की खंडपीठ ने 13 अगस्त के अंतरिम आदेश को खारिज कर दिया। इस आदेश के तहत सज्जन के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में मुकदमे की प्रक्रिया को जारी रखे जाने पर रोक लगा दी गई थी।

सज्जन ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी। इस अपील को रद्द करते हुए न्यायालय ने कहा कि मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश इन आरोपों का विश्लेषण और आकलन करने और किसी उचित परिणाम तक पहुंचने के लिए स्वतंत्र है।

न्यायालय ने सुनवाई अदालत को निर्देश दिया कि इस मुकदमे की कार्रवाई को तेज किया जाए, ताकि इसे जल्द से जल्द निपटाया जा सके। खंडपीठ ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की जांच के दौरान और सज्जन के खिलाफ जो विचार व्यक्त किए हैं, उनसे अदालत की किसी परिणाम तक पहुंचने की प्रक्रिया में बाधा नहीं आएगी।

न्यायालय ने कहा सुनवाई अदालत के सामने जो भी चीजें रखीं जाएं, वह उनके विश्लेषण और आकलन के लिए स्वतंत्र है। पीठ ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट जो भी विचार व्यक्त करे, सबूतों के विश्लेषण की सुनवाई अदालत की प्रक्रिया उससे प्रभावित नहीं होगी।

खंडपीठ के मुताबिक हमारा मानना है कि जो भी विचार व्यक्त किए गए हैं, वह बुरी मंशा से नहीं है और न ही कानून का दुरूपयोग हो सकता है। सज्जन ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। न्यायालय ने 13 सितंबर को उस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाई कोर्ट ने 19 जुलाई को सज्जन के खिलाफ मुकदमे पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।

अदालत ने सज्जन के खिलाफ लगे हत्या समेत कई आरोपों को यह कहते हुए रद्द करने से इंकार कर दिया था कि अभियोजन में देरी एक तरह से उनको फायदा पहुंचाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त को सज्जन के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई प्रक्रिया पर दो सप्ताह के लिए रोक लगा दी थी। कांग्रेस नेता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने तर्क दिया था कि अदालत ने जो भी विचार व्यक्त किए हैं, उनसे मुकदमे पर प्रभाव पड़ेगा।

एक विशेष अवकाश याचिका में सज्जन ने तर्क दिया था कि शिकायतकर्ताओं ने उनके खिलाफ जो बयान दिए हैं, वे अविश्वसनीय हैं और हाई कोर्ट ने जो विचार व्यक्त किए हैं, वो अवांछित थे और इनसे मुकदमे के भविष्य पर असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर सीबीआई ने सज्जन के खिलाफ जांच के अपने फैसले का यह कहते हुए बचाव किया था कि यह फैसला संसद की ओर से किया गया है।

बाहरी दिल्ली से सांसद रह चुके सज्जन पर दो मामलों में अभियोजन चल रहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय के लोगों के खिलाफ भीड़ को उकसाया।

मुकदमा अदालत ने इस वर्ष मई में सज्जन के खिलाफ धारा 302 (हत्या), 395 (डकैती), 427 (संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की गई हरकत) और 153ए (दो समुदायों के बीच वैमनस्य) के तहत आरोप तय किए थे।

सीबीआई ने सज्जन पर आरोप लगाया कि उन्होंने लोगों को सिख समुदाय के खिलाफ उकसाया, जिसके बाद दिल्ली छावनी इलाके में पांच लोगों की मौत हो गई।

इस मामले में सज्जन के अलावा बलवान खोखर, कष्ण खोखर, महेंद्र यादव, कैप्टन भागमल और गिरधारी लाल भी आरोपी हैं।

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