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चुनौतियों से जीत जाएंगे हम: उमर

चुनौतियों से जीत जाएंगे हम: उमर

कश्मीर में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे से ऐन पहले राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को अपने इस्तीफे की सम्भावना से इनकार करते हुए उम्मीद जताई कि विवादास्पद सशस्त्र बल विशेष शक्ति कानून (एएफएसपीए) को जल्द ही पूरे राज्य से हटा लिया जाएगा लेकिन इसके लिए अवाम को शांतिपूर्ण माहौल पैदा करना होगा।

उमर ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा गम्भीरता दिखाते हुए एएफएसपीए का हटाया जाना कश्मीर की जनता में विश्वास के निर्माण की दिशा में उठाया जाने वाला पहला कदम होगा। इससे भविष्य में समस्या को सुलझाने के लिए अन्य कदम उठाए जा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने साक्षात्कार में कहा कि मैं परेशानियों से डरकर पीठ दिखाने वाला शख्स नहीं हूं। मैं एक जंगजू हूं और मुझे चुनकर सत्ता सौंपने वाले लोगों पर आए संकट को खत्म करना होगा। इंशाअल्ला हम कामयाब होंगे।

उमर से साक्षात्कार के मुख्य अंश-

प्र- सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल श्रीनगर आने वाला है। आपकी क्या उम्मीदें हैं और आपका उन लोगों के प्रति क्या नजरिया है जो जोर देकर कह रहे हैं कि राज्य में सामान्य स्थिति की बहाली के लिए आपको पद छोड़ देना चाहिए।

उ- मैं परेशानियों की तरफ पीठ दिखाने वालों में से नहीं हूं। मैं एक जुझारू व्यक्ति हूं और मुझे चुनकर सत्ता सौंपने वाले लोगों पर आए संकट को खत्म करना होगा। इंशाअल्ला हम कामयाब होंगे। वर्ष 2008 में हुए चुनाव के बाद सरकार बनाने में नाकाम रहे कुछ हताश राजनीतिक तत्व मेरे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यहां तक कि अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी या मीरवाइज का भी मेरी सरकार के साथ कोई मसला नहीं है। वे अपनी दो दशक पुरानी विचारधारा को आज भी व्यक्त कर रहे हैं।

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कल यहां पहुंच रहा है और मुख्यमंत्री होने के नाते मैं सरकार की ओर से विश्वास दिला सकता हूं कि मौजूदा संकट का समाधान निकालने के प्रति गम्भीर सभी लोगों को प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का मौका दिया जाएगा। मैं बातचीत के लिए आमंत्रित सभी लोगों से गुजारिश करता हूं कि वे प्रतिनिधिमंडल के सामने अपनी बात रखने के मौके का इस्तेमाल जरूर करें।
मुझे उम्मीद है कि वे हर वर्ग के लोगों चाहे वे मुख्यधारा के हों या अलगाववादी संगठन हों, से मिलेंगे। मैं आमंत्रित लोगों के अलावा प्रतिनिधिमंडल से मिलने के इच्छुक लोगों से अपील करता हूं कि वे इसके लिये सम्बन्धित जिला प्रशासन से सम्पर्क करें।

प्र- आजादी की आवाज की किस रूप में व्याख्या की जाती है अनेक प्रेक्षकों का मानना है कि स्थिति उस बिंदु पर पहुंच चुकी है जहां से लौटने का रास्ता नहीं है। राजनीतिक समाधान तथा गुस्से को शांत कैसे किया जाता है।

उ- मैं नहीं मानता कि हालात उस स्थिति में पहुंच चुके हैं जहां से वापस नहीं लौटा जा सकता। हमें यह समस्या विरासत में मिली है और विश्वास निर्माण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं और उठाए जाएंगे। कश्मीर को आगे ले जाना मेरा मकसद है। यह मुश्किल घड़ी है लेकिन मेरी सरकार का मजबूत इरादा है कि सम्बन्धित सभी पक्षकारों की चिंताओं को हल किया जाए। मुझे विश्वास है कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से राज्य तथा केन्द्र सरकार को आगे बढ़ने का रास्ता मिलेगा।

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