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अल्पसंख्यक आयोग में सिखों को नहीं मिला प्रतिनिधित्व

राज्य अल्पसंख्यक आयोग में सिखों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं देने पर सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका पर आठ मई को हाइकोर्ट में सुनवाई निर्धारित की गयी है। याचिका में कहा गया है कि आयोग में उपाध्यक्ष के दोनों पदों पर मुसलिम समुदाय को नियुक्त किया गया है, जो सही नहीं है। पूर आयोग में एक सदस्य ही सिख है। यह सिख कौन है, इसकी जानकारी भी कमेटी को नहीं है, जबकि सिखों के मामले में कोई भी निर्णय सरकार इसी कमेटी की सलाह से करती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। याचिका में कहा गया है कि बिहार के समय से ही अल्पसंख्यक आयोग के गठन में अध्यक्ष मुसलिम, उपाध्यक्ष के दो पद पर एक ईसाई और एक सिख को नियुक्त किया जाता रहा है। लेकिन झारखंड में उपाध्यक्ष के दोनों पद मुसलमानों को दे दिया गया है।ड्ढr नये आयोग के लिए कल्याण विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर तत्कालीन मधु कोड़ा सरकार के पास भेजा था। इसमें उपाध्यक्ष के दो पदों में एक सिख को देने की बात कही गयी थी। सीएम ने इसे अनुमोदित कर दिया था और सदस्यों के नाम विजिलेंस जांच के लिए भेजने को कहा था, तभी यह सरकार गिर गयी। इसके बाद शिबू सोरन की सरकार ने भी प्रक्रिया शुरू की, लेकिन राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।ड्ढr बाद में कल्याण विभाग ने यह प्रस्ताव राजभवन भेजा। राजभवन ने पूछा था कि जिन सदस्यों के नाम प्रस्तावित हैं, उनकी विजिलेंस जांच हुई है या नहीं। इसके बाद राज्यपाल के प्रधान सचिव ने 20.2.0ो फाइल मंगायी। इसी दिन प्रधान सचिव ने उपाध्यक्ष के दूसर पद पर भी मुसलमान का नाम तय कर अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया। यह भी निर्देश दिया गया कि अधिसूचना जारी होने के बाद विजिलेंस इन्क्वायरी करायी जाये।ड्ढr कमेटी ने इसकी सूचना प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय को भी दी है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने केंद्रीय कल्याण मंत्रालय को इस मामले को देखने को कहा। इसके बाद राज्यपाल के पास भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद जनहित याचिका दायर की गयी।ड्ढr मंदिर परिसर में बाउंड्री करने की छूटड्ढr रांची। झारखंड हाइकोर्ट ने आदित्युपर स्थित शीतला माता मंदिर के पास बाउंड्री कराने की छूट प्रार्थी को प्रदान की है। चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र और जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट ने सरकार से भी कहा है कि यदि वह चाहे, तो खुद बाउंड्री दे सकती है। इस निर्देश के साथ अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी। महेश खीरवाल ने जनहित याचिका दायर कर उक्त मंदिर परिसर में किये गये अतिक्रमण का मामला उठाया गया था। इस पर पूर्व में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार को अतिक्रमण हटाने का निर्देशड्ढr दिया था। सरकार की ओर से बताया गया कि मंदिर परिसर से अतिक्रमण हटा दिया गया है। जबकि प्रार्थी का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के बाद भी कुछ लोग पुन: वहां रहने लगे हैं। मंदिर की सुरक्षा के लिए बाउंड्री का होना जरूरी है।

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