DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

पहले से कम नहीं नजफगढ़ के दूसरे नवाब

दिल्ली के नजफगढ़ में नवाबी को लेकर आने वाले समय में घमासान हो सकता है। अभी दुनिया के तेज से तेज गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले वीरेंद्र सहवाग के नाम इस इलाके की नवाबी है। उन्हें नजफगढ़ का नवाब कहा जाता है। अब जब इसी इलाके के रहने वाले पहलवान सुशील कुमार ने दुनिया के पहलवानों को धोबी पाट से चित करके गोल्ड मेडल जीत लिया है, तो उनकी दावेदारी भी इस खिताब पर बढ़ गई है।

वैसे भी सहवाग नजफगढ़ के अखाड़े वाले इलाके में जाने से डरते रहे हैं। सहवाग ने सुशील की जीत पर उन्हें बधाई दी है और यह भी कहा है कि बचपन में वह अखाड़े वाले इलाके की तरफ नहीं जाते थे। सहवाग कहते हैं कि उन्हें इस बात का डर लगता था कि पहलवान पटक कर मार डालेंगे।

सुशील से जब सहवाग मिलेंगे, तो उनका यह भ्रम टूट जाएगा। सुशील सचमुच सुशील हैं। ताकतवर होने के बावजूद विनम्र इतने कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अपनी ताकत का वह बेजा प्रदर्शन नहीं करते। उसे वह सिर्फ अखाड़े में दिखाते हैं और मेडल जीतते हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि नजफगढ़ के अब दो नवाब होंगे और दोनों में कोई वैमनस्य नहीं होगा।

बापड़ौला गांव के सोलंकी जाट परिवार में 26 मई, 1983 को जन्मे सुशील ने मास्को में जब 12 सितंबर, 2010 को विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रूसी पहलवान को चित कर ‘सोना’ हासिल किया, तो भारतीय कुश्ती को एक नया आयाम मिला। इसी के साथ एक नया इतिहास भी रचा गया। आज तक भारत ने कुश्ती प्रतियोगिता में कभी भी गोल्ड मेडल नहीं जीता था। ऐसा करने वाले सुशील पहले भारतीय हैं।

इससे पहले भी सुशील ओलंपिक में कांस्य और एशियाई कुश्ती में गोल्ड हासिल कर चुके हैं, लेकिन विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में वह विश्व विजेता बनने के लिए बेताब थे, जिसे उनकी व द्रोणाचार्य अवार्डी गुरु महाबली सतपाल की मेहनत तथा परिवार की तपस्या ने पूरा कर दिया।

सुशील के पिता दीवान सिंह सोलंकी एमटीएनएल में ड्राइवर हैं और मां कमला देवी गृहिणी। सुशील ज्यादातर समय हरियाणा के सोनीपत में अभ्यास के लिए कैंप में रहते हैं। गाहे-बगाहे ही घर आते हैं। बावजूद इसके उन्हें घर का दूध, मक्खन और घी मिलता है। सुशील के चाचा महिपाल प्रतिदिन बापड़ौला से सोनीपत उनके लिए चार लीटर दूध लेकर जाते हैं। उनके चाचा को प्रतिदिन सुशील को दूध पहुंचाने के लिए 105 किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है। 

कुश्ती के प्रति सुशील की ऐसी दीवानगी है कि उन्हें कुश्ती के आगे कुछ सूझता ही नहीं है। टीवी कार्यक्रम ‘झलक दिखला जा’ में डांस करने के लिए एक बार उन्हें चालीस लाख रुपये का ऑफर मिला। लेकिन सुशील ने इस प्रस्ताव को विनम्रता के साथ यह कहते हुए ठुकरा दिया कि उसे कुश्ती करना है डांस नहीं। इसी प्रतिबद्धता ने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। सुशील को राजीव गांधी खेल रत्न और अर्जुन पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। मास्को से लौटकर सुशील कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों में जुट गए हैं। यहां भी उनका लक्ष्य गोल्ड मेडल है।              

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:पहले से कम नहीं नजफगढ़ के दूसरे नवाब