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बुनियादी ढांचे के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशेगा आरबीआई

बुनियादी ढांचे के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशेगा आरबीआई

भारतीय रिजर्व बैंक [आरबीआई] के उप गवर्नर डा सुबीर गोकर्ण ने कहा है कि बैंकिंग सुधारों में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में पूंजी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना एजेंडे में शामिल है।

डा. गोकर्ण ने यहां कहा कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए वित्तीय स्रोतों की बैंकों के अलावा अलग व्यवस्था सरकारी-निजी क्षेत्र की भागीदारी की दिशा में एक बडा़ कदम होगा। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, शिक्षा और रोजगार के लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। बैंक बुनियादी क्षेत्र के लिए पूंजी उपलबध कराना चाहते हैं, लेकिन उनके पास इतनी क्षमता नहीं है और बैंक छोटी अवधि की परियोजनाओं के लिए ऋण उपलबध कराना चाहते हैं।

डा. गोकर्ण ने कहा कि आरबीआई के लिए मुद्रास्फीति का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। आर्थिक परिदृश्य आश्चर्यजनक है। एक ओर जहां वैश्विक दाम नीचे की ओर हैं, वहीं देश में कीमतों में मजबूती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ वर्षों में मौद्रिक नीति आर्थिक विकास को ध्यान में रखकर तय की जाएगी। आरबीआई बैंकों के साथ मिलकर अधिक से अधिक लोगों को बैकिंग तंत्र में लाने के प्रयास कर रहा है जिससे आर्थिक तेजी का लाभ ज्यादा से ज्यादा आबादी तक पहुंचे।

आरबीआई चाहता है कि आर्थिक समृद्धि का लाभ कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी पहुंचे। हाल में ही रेपो और रिवर्स रेपो दर बढाने पर उन्होंने कहा कि दोनों दरों में अंतर कम होने से पूंजी बाजार में कम उतार चढा़व होगा।

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