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पढ़ाई छोड़ बच्चे नरगा में चला रहे हैं फावड़ा

नरेगा में लाख सोशल ऑडिट हो, सरकार कड़ाई कर, लेकिन इसमें गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। राज्य के सुदूरवर्ती इलाकों में नरगा में घपलेबाजी की बातें सामने आती हैं, तो लगता है कि उच्चाधिकारियों की पहुंच नहीं है। इसलिए पंचायत सेवक और संबंधित पदाधिकारी गड़बड़ी कर बच निकलते हैं। जब बात राजधानी के बगल की हो, तो उसपर सहा विश्वास नहीं होता, लेकिन ऐसा हुआ है। तस्वीरं खुलकर इसकी दास्तान कह रही हैं। और तो और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि ने अपनी आंखों के सामने स्कूली बच्चों को बकायदा स्कूल ड्रेस में नरगा के काम में फावड़ा चलाते हुए पकड़ा। यह वाकया है तोरपा प्रखंड के जागु गांव से टेमटोली तक डेढ़ किलोमीटर मोरम सड़क का। भाजपा विधायक कोचे मुंडा उस मार्ग से गुजर रहे थे, तभी उनकी नजर सड़क निर्माण में लगे स्कूली अल्पवय बच्चों पर पड़ी। वे हतप्रभ रह गये कि जिन हाथों में कलम, कॉपी-किताब होनी चाहिए, उन हाथों में भारी-भरकम फावड़ा है। इन बच्चों की पढ़ाई पर सरकार के बजट का एक तिहाई हिस्सा खर्च होता है, वे पढ़ाई की जगह परिवार के भरण-पोषण के लिए नरगा की योजनाओं में काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इनकी मजदूरी का भुगतान किस मद में होगा? क्योंकि नरगा के काम में उन्हीं लोगों का भुगतान होता है, जिनका जॉब कार्ड होता है, पोस्ट ऑफिस में खाता रहता है। निश्चित तौर पर यहां नरगा के कार्य में घपलेबाजी होगी ही। क्योंकि बाल श्रमिकों से काम करना वह भी नरगा में कानूनन जुर्म है। नियमानुसार जिस स्थान पर काम चलता है, वहां पानी, विश्राम के लिए शेड और प्राथमिक उपचार के लिए दवा की भी व्यवस्था रहती है, लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है।

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