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नोएडा पार्क के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं

नोएडा पार्क में दलित नेताओं की प्रतिमाएं और स्मारक बनाने के अपने कदम का बचाव करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को हाई कोर्ट से कहा कि इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार ने कहा कि परियोजना अधिसूचना के अंतर्गत नहीं है। यदि यह अधिसूचना के अंतर्गत होती तो उसमें पर्यावरण मंजूरी की जरूरत पड़ती।

उप्र सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल ने प्रधान न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली विशेष वन पीठ से कहा कि इस परियोजना में शामिल क्षेत्रफल महज 33.43 हेक्टेयर है। यह एक लाख 50 हजार वर्ग मीटर के निर्धारित मानक से काफी कम है। इतनी या अधिक भूमि होने पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी लेनी पड़ती है। इससे पूर्व वरिष्ठ वकील पीठ से कह चुके थे कि यह परियोजना वन क्षेत्र में नहीं है।

उन्होंने कहा था कि 6194 वृक्ष काटे गए जिनमें से महज 47 स्थानीय प्रजाति के थे। उनको काटने के लिए मंजूरी की जरूरत पड़ती है। उनके लिए अनुमति प्राप्त की गई।

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