DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आज हम उनकी दुआओं का असर देखेंगे..

यह फिल्म कुछ घंटों की नहीं है। दिनों की है। अब क्लाइमेक्स है। लेकिन हीरो फिलहाल नेपथ्य में जनता स्टार। फैसला जजों की सामूहिक टीम जनता को करना है। वही तय करगी कि फिल्म किसके लिए सुखांत या दुखांत होगी। स्टार अब मां की शरण में हैं। मंगलवार की शाम शॉटगन चौहट्टा कालीमंदिर गये थे और बुधवार की सुबह शेखर सुमन मां पटनदेवी की गोद में। देखना होगा कौन कहेगा मेर पास मां (जनता) है। इस नवगठित लोकसभा क्षेत्र में शुरू से ही पल-पल चीजें बनती रहीं, टूटती और बदलती रहीं। पहले लोगों के बीच ‘बड़ा कद’ रखने वाले शाटगन ने भाजपा से प्रत्याशी बनने में सफलता पायी। फिर अचानक उनके मुकाबले शेखर सुमन जोर-शोर से मैदान में आ खड़े हुए। शेखर को पता था यह आसान नहीं होगा। सामने खड़ा था राजनीति में 20 साल का अनुभवी। तीसर पात्र राजद उम्मीदवार विजय साहू वैश्यों के सहार सीधे समीकरणों को तोड़ने को उतारू थे। आरंभ में जिस तरह से शाटगन के लिए यह क्षेत्र आसान दिख रहा था, इन दोनों उम्मीदवारों ने यहां लड़ाई को दिलचस्प बना दिया।ड्ढr ड्ढr उधर चुनाव प्रचार के अंतिम दिन आलमगंज-सुल्तानगंज में शत्रुघ्न का गर्मजोशी से स्वागत और विजय साहू के पक्ष में वैश्य संगठनों द्वारा पटना सिटी में रोड शो के अपने संकेत हैं। हालांकि लड़ाई के अंत तक संसदीय क्षेत्र के छह विस क्षेत्रों बख्तियारपुर, फतुहा, पटना साहिब, कुम्हरार, बांकीपुर और दीघा की जातीय बुनावट और स्थानीय रुख को देखें तो मुकाबला त्रिकोणीय दीखता है। यहां दो-दो लड़ाइयां हैं। एक लड़ाई जातीय वोट बैंक को लेकर है। इसमें खासकर कायस्थ वोटों को लेकर शत्रुघ्न सिन्हा और शेखर सुमन आमने-सामने हैं। हालांकि कायस्थों को एक करने के लिए पहले कभी पटना में इतनी आक्रामकता नहीं दिखी। घर-घर बैठकें हो रही हैं। उधर वजह चाहे शत्रुघन और सीपी ठाकुर के रिश्ते हों या कोई और। भूमिहार (डेढ़ लाख) वोटर भी बहुत एग्रसिव नहीं हैं। वहीं वैश्य मतों में विजय साहू और शाटगन की लड़ाई है। पहली लड़ाई में जहां आंशिक बिखराव की उम्मीदें हैं वहीं दूसरी लड़ाई में भाजपा की प्रतिष्ठा और साहू का समाज दांव पर है। भाजपा के नंदकिशोर यादव इसी को लेकर लगातार पटना सिटी में जमे रहे। मोदी, राबड़ी, लालू और रामविलास सरीखे नेताओं ने यहां अपने कद को वोटरों के सामने झोंका।ड्ढr ड्ढr पटना साहिब के करीब सवा लाख मुसलमान वोट भी जीत का सेहरा बांधने में निर्णायक होंगे। शाटगन के व्यक्ितत्व और कद को लेकर इस समूह का कुछ वोट तो उन्हें जरूर पड़ेगा लेकिन असल बंटवारा कांग्रस और राजद के बीच ही होने की बात सब्जीबाग निवासी सुलेमान भाई बताते हैं। वैसे भी कांग्रस और राजद उम्मीदवारों को एक लड़ाई आपस में लड़नी होगी। जो पार पाएगा वह भाजपा उम्मीदवार से दो-दो हाथ करगा। पीरमुहानी के रामदेव राय की मानें तो-‘इहां लड़ाई शत्रुघ्न आ साहू में हबऽ। कांग्रस तऽ तेसर नम्बर पर हबऽ’। हां, संघर्ष का एक कोण वामदल के साझा प्रत्याशी राम नारायण राय (माले) भी थामे हैं। बहरहाल जो भी जीते-जो भी हार सब तय करगा, बुद्धिजीवी मतदाताओं वाली इस सीट पर कितने लोग मतदान करने घर से निकले। जिस प्रत्याशी का वोट बैंक अधिक बूथ तक पहुंचेगा, विजय उसी का माथा चूमेगी।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: आज हम उनकी दुआओं का असर देखेंगे..