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95 के हुए हुसैन, बरकरार है कला से नाता

95 के हुए हुसैन, बरकरार है कला से नाता

प्रख्यात भारतीय चित्रकार एम.एफ. हुसैन शुक्रवार को 95 साल के हो गए लेकिन कला की दुनिया से अब भी उनका नाता है और वह दुनिया के सामने लगातार उनकी नई-नई पेंटिंग्स पेश कर रहे हैं।

अपना देश छोड़कर दोहा में बस गए हुसैन इन दिनों विशालकाय मुरानो ग्लास हार्सेज बना रहे हैं। हुसैन ने 2006 में भारत छोड़ा था। यहां के उनके कुछ दोस्त लगातार उनके संपर्क में बने हुए हैं और कहते हैं कि हुसैन अपने देश लौटने को बहुत उत्सुक हैं।

प्रख्यात कलाकार, डिज़ाइनर और फोटोग्राफर राम रहमान ने कहा कि हुसैन भारत लौटना चाहते हैं लेकिन इस समय जो स्थितियां हैं उन्हें देखते हुए उनके लिए यह संभव नहीं है। वह देश छोड़कर नहीं जाना चाहते थे लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां बनीं कि उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा। उनके जैसे सक्रिय और उत्साही आदमी के साथ ऐसा होना एक भयानक बात है।

उन्होंने कहा कि उनमें 95 वर्ष की आयु में भी अविश्वसनीय ऊर्जा है। वह वर्तमान में चार विशाल मुरानो ग्लास हार्सेज बना रहे हैं जिन्हें एक विशाल कला संरचना में कारों के समूह के साथ रखा जाएगा। उन्होंने कलाकृति में कारों के लिए इंजन की आवाज़ रिकॉर्ड की है और संगीतकार ए. आर. रहमान से इसके लिए संगीत तैयार करने को कहा है।

हुसैन का जन्म 17 सितम्बर, 1915 को मध्य प्रदेश के पंडरपुर में हुआ था। वह 20 वर्ष की उम्र में जे.जे. कॉलेज ऑफ आर्ट में पढ़ाई के लिए मुंबई चले गए थे। उन्होंने 40 और 50 के दशक में सिनेमा के पोस्टर पेंट कर अपना और अपने परिवार का खर्च चलाया था।

उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि हमें प्रति वर्ग फुट में पेंट करने के लिए मुश्किल से चार या छह आना दिया जाता था। यह पैसा छह फुट चौड़ी और 10 फुट लंबी पेंटिंग के लिए मिलता था, हमने कुछ रुपये कमाए। न्यू थियेटर के अलावा और कोई हमें पैसा नहीं देता था।

अपनी कुछ पेंटिंग्स में हिंदू देवियों को आपत्तिजनक तरीके से दिखाने के बाद दक्षिणपंथी हिंदू गुटों के विरोध का सामना कर रहे हुसैन 2006 में संयुक्त अरब अमीरात चले गए थे।

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