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संबंधों के लिए महत्वपूर्ण होगी ओबामा की यात्राः मीरा शंकर

संबंधों के लिए महत्वपूर्ण होगी ओबामा की यात्राः मीरा शंकर

अमेरिका में भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने कहा है कि नवंबर में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की यात्रा को लेकर भारत उत्सुक है और उनकी यात्रा विश्व के दो सबसे महान लोकतंत्रों के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

बाल्टीमोर काउंसिल ऑन फॉरेन अफेयर्स के समक्ष मीरा शंकर ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं राष्ट्रपति ओबामा की आगामी यात्रा दोनों लोकतंत्रों की संयुक्त उपलब्धियों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी। ओबामा की यात्रा उन क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी जहां हम मिल कर काम कर रहे हैं, जहां अभी सफलताएं मिलनी हैं तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार के साथ भारत को उसका वाजिब स्थान मिलना है।

मीरा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सदस्यता के लिए समर्थन बढ़ रहा है और इससे भारत को अपनी भूमिका को पूरी तरह निभाने की क्षमता मिलेगी। 21वीं सदी में भारत अमेरिकी संबंध एक महत्वपूर्ण सामरिक साझेदारी है। उन्होंने कहा कि हम उत्साहित होकर इस साल नवंबर में होने वाली राष्ट्रपति ओबामा की यात्रा का इंतजार कर रहे हैं। तेजी से बदल रही सामरिक साझेदारी में यह मील का पत्थर साबित होगी।

अमेरिका में भारतीय राजदूत मीरा शंकर ने कहा, पिछले साल हुई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की वाशिंगटन यात्रा का मकसद आपसी संबंधों के द्विपक्षीय आयामों को आगे बढ़ाकर इसे वैश्विक साझेदारी में बदलना था।

समुद्री, साइबर और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों सहित एशियाई और वैश्विक संदर्भ में कई मुद्दों में भारत और अमेरिका की साझी रूचि है। इन क्षेत्रों में व्यापार और सूचनाओं की मुक्त आवाजाही दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि साइबरस्पेस में भी हमें उपयुक्त नियम बनाने की जरूरत है ताकि इस क्षेत्र द्वारा दी गई स्वतंत्रता का गलत इसतेमाल नहीं हो।

भारतीय राजदूत ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग नए क्षेत्रों और नई सीमाओं में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि मुंबई आतंकी हमलों के बाद दोनों देशों के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग ने रफ्तार पकड़ी है और दोनों देशों ने खुफिया जानकारी, सूचनाओं और अनुभवों के आदान प्रदान के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार किया है।

मीरा ने कहा कि हमारी सेनाएं पहले एक दूसरे के लिए अनजान थीं लेकिन अब दोनों के बीच नियमित वार्ताएं होती हैं। वे दस्यु रोधी अभियानों में और मानवीय मिशनों में साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया, एक दशक पहले हमारा रक्षा व्यापार नाममात्र का था। पिछले कुछ सालों में यह चार अरब अमेरिकी डॉलर का हो गया है। यह और भी बढ़ सकता है क्योंकि भारत अपनी आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना चाहता है और अपनी रक्षा उत्पाद क्षमताओं को निजी क्षेत्रों की ज्यादा भागीदारी से विकसित करना चाहता है।

मीरा शंकर ने कहा कि अक्टूबर 2008 में हस्ताक्षरित भारतीय अमेरिकी परमाणु समझौते ने द्विपक्षीय रिश्तों में बाधा बनी बड़ी समस्या को खत्म कर दिया और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, उर्जा सुरक्षा में ज्यादा प्रभावी साझेदारी, गहरे आर्थिक संबंधों और परमाणु अप्रसार का आधार बना।

उन्होंने कहा कि भारत के चंद्रमा मिशन चंद्रयान-1 में सहयोग के साथ हमने अपने संबंधों का दायरा बढ़ाया। मिशन अमेरिकी पेलोड को साथ ले गया जिससे चंद्रमा पर पानी की खोज करने में मदद मिली।

भारतीय राजदूत ने बताया कि अंतरिक्ष की खोज, अंतरिक्ष की उड़ान, मौसम संबंधी आंकड़े और जलवायु प्रवत्ति ऐसे क्षेत्र हैं जहां सहयोग बढाया जा सकता है। उच्च तकनीकों में द्विपक्षीय सहयोग ऐसा होना चाहिए जिससे हमारी सामरिक साझेदारी प्रदर्शित होनी चाहिए।

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