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अयोध्या मामले पर आरएसएस का रुख आक्रामक नहीं होगा

आयोध्या मामले पर 24 सितंबर को अदालती फैसला आने तथा अदालत के अंतिम समय में इस मुद्दे का कोई सर्व स्वीकार्य हल तलाशने के प्रयासों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) राम मंदिर से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर कोई आक्रमक रुख नहीं अपनाएगा।

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचारकों की शुरू हुई दो दिवसीय बैठक में आज आरएसएस और विहिप नेताओं ने इस विषय पर लम्बी चर्चा की। कल भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह ने भी आरएसएस प्रमुख से मुलाकात की थी।

सूत्रों ने बताया कि संघ का पूरा प्रयास होगा कि इस विषय का बातचीत के जरिये या सोमनाथ मंदिर की स्थापना की तरह से कानून बनाकर कोई हल निकाला जाए। यह सरसंघचालक, सिंघल, तोगड़िया और अन्य लोगों का भी मानना है।

उन्होंने बताया कि अदालत की विशेष पीठ के समक्ष वकील ऐसे ही विचार व्यक्त करेंगे। हालांकि इसके बाद अदालत का फैसला पक्ष या विपक्ष में आने पर संघ कोई झंझट नहीं खड़ा करेगा।

इधर, विहिप अध्यक्ष अशोक सिंघल और महासचिव प्रवीण तोगड़िया आज सुबह संघ मुख्यालय पहुंचे और उन्होंने सरसंघ चालक मोहन भागवत से व्यापक विचार विमर्श किया। इस बैठक में बाद में संघ प्रचारक एवं भाजपा नेता रामलाल भी शामिल हुए।

संघ और विहिप के सूत्रों ने हालांकि सम्मेलन को नियमित बताया, लेकिन कहा कि बैठक में अयोध्या मामले पर 24 सितंबर को आने वाले अदालती फैसले और अंतिम समय में अदालत के कोई स्वीकार्य हल तलाशने के विषय पर चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि पहले यह बैठक उड़ीसा के पुरी में होनी तय थी लेकिन कई कारणों से इसे यहां नई दिल्ली में आयोजित किया गया है। दो दिवसीय इस बैठक में संघ नेता भैया जी जोशी, दत्तात्रेय होसबोले, सुरेश सोनी भी शामिल थे।

अदालत की विशेष पीठ ने कल अयोध्या मामले से जुड़े सभी पक्षों को बुलाया है ताकि कोई सर्व स्वीकार्य हल तलाशने का रास्ता निकाला जा सके। अगर इसका कोई नतीजा नहीं निकलता है तो अदालत 24 सितंबर को फैसला सुनाएगी।

समझा जाता है कि संघ की ओर से अयोध्या मामले पर विभिन्न सहयोगी पक्षों से सलाह करने और इस विषय को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इस सिलसिले में समर्थन जुटाने के लिए विहिप नेताओं ने कुछ दिन पहले अकाली दल से चर्चा की थी।

सूत्रों ने बताया कि सरसंघचालक मोहन भागवत की मौजूदगी में हुई आरएसएस की दो दिवसीय बैठक में संगठन के संगठनात्मक विषयों के अलावा राम मंदिर पर 24 सितंबर को अदालत का फैसला आने के बाद की स्थिति, कश्मीर में लगातार जारी हिंसा के मद्देनजर कुछ वर्गों की ओर से राज्य के लिए स्वायत्तता दिए जाने एवं एएफएसपीए हटाये जाने की मांग, कथित भगवा आतंकवाद शब्द का प्रचार किए जाने जैसे मुद्दे सामने आए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब मंगलवार को ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने कहा था कि निश्चित तौर पर, हिंदू समाज की आकांक्षा है कि रामजन्मभूमि पर मंदिर बनाया जाना चाहिए। इस संबंध में फैसले पर संघ की प्रतिक्रिया इन इच्छाओं के अनुरूप होगी। संगठन सुनिश्चित करना चाहेगा कि वहां राम मंदिर का निर्माण हो।

कानून के माध्यम से राम मंदिर के निर्माण का पक्ष लेते हुए भागवत ने हालांकि कहा था हमारे तरफ से कोई झंझट नहीं होगा। संघ की प्रतिक्रिया कानून एवं संविधान के दायरे में होगी। भागवत ने कश्मीर की स्थिति और स्वायत्तता के सवाल और शब्दों को गैर-वाजिब करार देते हुए कश्मीर को पूरी तरह भारत में मिला देने की वकालत की थी। आरएसएस प्रमुख ने भगवा आतंकवाद शब्द को ही अनुपयुक्त करार दिया था।

 

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