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फ्लिंटाफ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया

फ्लिंटाफ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया

इंग्लैंड के एंड्रयू फ्लिंटाफ ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, जिससे उनका 12 साल का कैरियर समाप्त हो गया।

क्रिकेट के महान आलराउंडरों में से एक फ्लिंटाफ का कैरियर चोटों और विवादों के कारण काफी सुर्खियों में रहा है। इस 32 वर्षीय ने ओवल टेस्ट में 2009 एशेज खिताब जीतने के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी लेकिन आज उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कहने का निर्णय लिया। उन्होंने लंबे समय से चल रही घुटने की चोट के कारण तुरंत प्रभाव से संन्यास का फैसला किया।

फ्लिंटाफ ने 79 टेस्ट खेले हैं और 31.77 के औसत से 3845 रन बनाने के अलावा 226 विकेट भी अपने नाम किए। उन्हें हाल के दिनों में इंग्लैंड से निकलने वाले प्रतिभाशाली क्रिकेटरों में से एक समझा जाता है, हालांकि उनकी कई बार इसलिए भी आलोचना की गई कि वह अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए।

इस क्रिकेटर ने 141 वनडे मैचों में 32.01 के औसत से 3394 रन बनाए हैं और 169 विकेट हासिल किए। वह सात टवेंटी20 मैचों में पांच विकेट भी प्राप्त कर चुके हैं। क्रिकेट मैदान पर उनकी उपलब्धियों पर लगातार विवादों का भी गहरा असर पड़ा, जिसमें इंग्लैंड के 2001-02 में भारत दौरे के दौरान अपनी शर्ट निकालकर लहराना और वेस्टइंडीज में 2007 विश्व कप के दौरान नाव में शराब पीने की कुख्यात घटना भी शामिल है।

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके फ्लिंटाफ घुटने की कई सर्जरी करा चुके हैं और उन्होंने इस सत्र में वापसी की उम्मीद जताई थी लेकिन पिछले महीने भी टीम में वापसी नहीं कर सके।

फ्लिंटाफ ने फिर आस्ट्रेलिया में टवेंटी20 और इंडियन प्रीमियर लीग में वापसी का लक्ष्य बनाया, जिसमें वह चेन्नई सुपरकिंग्स की ओर से खेलते हैं। लेकिन लंकाशर के क्रिकेटर के पास संन्यास लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था क्योंकि यह फैसला उन्होंने हाल में अपने सर्जन से बात करने के बाद लिया है। सर्जन ने उन्हें बताया कि उनका शरीर अब क्रिकेट के उतार चढ़ावों को नहीं सह सकता।

फ्लिंटाफ ने कहा कि मैं काफी दुखी और निराश होकर आज क्रिकेट के सभी प्रारूपों से अपने संन्यास की घोषणा कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि मैंने अपने मेडिकल सलाहकार से बातचीत के बाद कल अपने कैरियर को समाप्त करने का यह फैसला किया। मुझे बताया गया कि मैं हाल में लगातार सर्जरी के बाद पिछले साल रिहेबिलिटेशन में जिन समस्याओं से जूझने की कोशिश कर रहा हूं, उससे मैं पूरी तरह नहीं उबर पाऊंगा इससे मेरा वापसी करना मुश्किल होगा।
 
फ्लिंटाफ ने कहा कि मुझे बताया गया कि मेरा शरीर क्रिकेट की गतिविधियों के लिए फिट नहीं होगा तो मेरे पास संन्यास लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि मैं अपने परिवार, लंकाशर क्रिकेट क्लब, इंग्लैंड, अपने सभी प्रायोजकों, दोस्तों और सलाहकारों को उनकी मदद और इन सभी ने मेरे कैरियर में जो सहयोग मुझे दिया है, उसके लिए धन्यवाद करना चाहूंगा।
 
फ्लिंटाफ ने कहा कि इंग्लैंड के दर्शकों के से मुझे जो समर्थन और प्रेरणा मिली है, उसका मैं हमेशा आभारी रहूंगा। मैं भविष्य के बारे में फैसला करने से पहले ब्रेक लूंगा। उन्होंने 1998 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना टेस्ट आगाज किया था। वर्ष 2002 में उन्होंने सर्रे के खिलाफ नेटवेस्ट ट्राफी के क्वार्टर फाइनल में 135 रन बनाए थे। लेकिन उनकी फिटनेस इंग्लैंड प्रबंधन में मुद्दा बनी रही थी, जिन्होंने साफ कर दिया था कि वे उनके बढ़ते वजन से नाखुश हैं।

 

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