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बंदूक से सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं नक्सली: मुखर्जी

बंदूक से सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं नक्सली: मुखर्जी

माओवादियों से निपटने के बारे में कांग्रेस में अलग-अलग विचारों के बीच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि नक्सली ऐसे राजनीतिक तत्व है जो सत्ता पर कब्जा करना चाहते हैं और उनका विकास का मुद्दा वास्तविकता से अधिक कल्पना है।

मुखर्जी ने कहा कि विकास की जरूरत है। विकास के अभाव में उनके (नक्सल) के कैडरों को मजबूती मिलेगी, लेकिन वे धर्मार्थ संस्थान नहीं चलाते हैं। वे राजनीतिक तत्व है और राज्य की सत्ता पर कब्जा करना चाहते हैं।

हिन्दी दैनिक नई दुनिया की ओर से लाल गलियारे में विकास विषय पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने हालांकि स्पष्ट किया कि यह विचार न तो सरकार के हैं और न ही कांग्रेस पार्टी के बल्कि अकस्मात आया विचार है। गौरतलब है कि हाल के महीने में दिग्विजय सिंह और केशव राव जैसे कांग्रेसी नेताओं ने माओवादियों से निपटने के गृहमंत्री पी चिदंबरम के तौर तरीकों से अलग विचार व्यक्त किए है। दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इसे केवल कानून एवं व्यवस्था की समस्या के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

वित्त मंत्री ने कहा कि माओवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन नहीं रखते हैं और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कल्याण योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए उपयुक्त माहौल जरूरी है।
 उन्होंने कहा कि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था में यकीन नहीं रखते। वे समझते हैं कि सत्ता बंदूक के बल पर हासिल की जा सकती है लेकिन अंतत: लोकतांत्रिक व्यवस्था की ही जीत होती है। वित्त मंत्री ने हालांकि व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर बल दिया।

नेपाल के पशुपतिनाथ से तिरूपति तक लाल गलियारे के अस्तित्व होने को नकारते हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इसे स्वीकार करना कठिन है और यह विचार दिमाग की उपज है। ऐसे मुहावरों का इस्तेमाल करना रूमानियत है। सत्तर के दशक में कोलकाता और पश्चित बंगाल में नक्सल आंदोलन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह समझते थे कि यह कभी खत्म नहीं होगा।

प्रणव ने कहा कि यह लम्बे समय तक नहीं चल सका और आगे भी लम्बे समय तक नहीं चल सकता है। माओवादी हिंसा के लिए विकास, अवसरों का अभाव एकमात्र कारण नहीं है। उन्होंने कहा कि यह वास्तविकता से अधिक कल्पना है।

मुखर्जी ने कहा कि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां सरकार का दखल नहीं चल रहा है और माओवादी समझते हैं कि वह समांतर सरकार चला रहे हैं तथा बंदूक के बल पर सरकार को हटा देंगे। उन्होंने कहा कि माओवादी नेता कभी भी आदिवासी बहुल क्षेत्र में उन्हें सुरक्षा और संरक्षण देने नहीं पहुंचे बल्कि बंदूक के बल पर सत्ता पर कब्जा किया है।

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