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आया साहसिक घुमक्कड़ी का मौसम

आया साहसिक घुमक्कड़ी का मौसम

क्या आपको पहाड़ों पर ट्रैकिंग का शौक है? यदि हां तो फिर देर किस बात की। चुनिए रूट और कसिए अपना रुकसेक। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर- साल की यह तिमाही ही तो है, जो पहाड़ों पर ट्रैकिंग के लिए आपको दावत देती है। यही मौसम है जब ऊंचाई वाले ट्रैकिंग रूटों को चटक हरे मखमली बसंत के हवाले कर बर्फ आसपास की चोटियों पर बैठी अलसा रही होती है। सालभर बर्फ के नीचे दुबकी हरी मखमली घास तरह-तरह के दिव्य फूलों और वनस्पतियों की सौगात भी साथ लाती है। यकीन मानिए, बसंत यहां इन्हीं महीनों पसरता है। हल्की गुनगुनी ठंड और 10 से 15 हजार फुट की ऊंचाई पर प्राय: पड़ने वाली फुहारों के बीच ऊंचाइयां लांघने का मजा ही कुछ और होता है।

उत्तराखंड में दजर्नों ऐसे मनोरम स्थल हैं, जहां आप अपनी क्षमता के हिसाब से रूट चुन सकते हैं। प्राय: 10 से 15 हजार फुट की ऊंचाई पर मौजूद इन गंतव्यों में हिमशिखरों की गोद में हिलोरें लेते अनूठे सरोवर, ग्लेशियर, सुंदर हरे मखमली मैदान (बुग्याल) और तीर्थ शामिल हैं। लेकिन इस साहसिक घुमक्कड़ी मेंअसल परीक्षा आपके साहस की ही है। यानी जितना साहस जुटा सकते हैं, उसी के अनुरूप गंतव्य आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।

कैसे-कैसे गंतव्य

कम कठिन : केदारनाथ, हेमकुंड, फूलों की घाटी, गोमुख, तुंगनाथ, चंद्रशिला, हरकी दून, देवरिया ताल इत्यादि
कठिन : बेदिनी बुग्याल, औली बुग्याल, दियारा बुग्याल, रुद्रनाथ इत्यादि
अधिक कठिन : रूपकुंड, काकभुषुंडी, केदारताल, सतोपंथ, क्वांरीपास, खतलिंग, सहस्त्र ताल, मिलम ग्लेशियर इत्यादि
अत्यधिक कठिन : ट्रेल पास, चंद्रताल, हेमकुंड, कालिंदीखाल

कैसे जाएं

अधिकांश जगहें गढ़वाल के चमोली, टिहरी और उत्तरकाशी जिलों में हैं, लिहाजा आपको हरिद्वार-ऋषिकेश तो पहुंचना ही है। यहां से बस लें। जिस मुख्य सड़क मार्ग पर बस छोड़ेगी, वहां से मुकाम के लिए अंतिम सड़क मार्ग तक जीप-टैक्सियां भी चलती रहती हैं। एक-दो पड़ावों तक गांव आपके साथ रहेंगे और ठहरने-खाने की उतनी परेशानी नहीं होगी। लेकिन, जैसे ही ऊंचाई पर बढ़ते हुए ट्री-लाइन समाप्त होने को होगी, काफी कुछ बदलने लगेगा। अब आप आठ से दस हजार फुट की हाइट पर कुदरत के सामने हैं। आपका साक्षात्कार भोज वृक्षों, मखमली घास के मैदानों, भांति-भांति की वनस्पति व पुष्पों, बर्फ से ढके सफेद शिखरों और ऊंचाई पर पाए जाने वाले शांत वन्य जीवों से होता है। यह वातायन अगले पड़ाव तक पहुंचते-पहुंचते एक खास तरह की थ्रिल में बदलने लगता है, क्योंकि अब आपके सामने चट्टानी रास्ता है तो कुछेक जगहों पर ग्लेशियरों को पार करने की चुनौती भी। अभी आप 13-14 हजार फुट की हाइट पर हैं। यहां पल में धूप, पल में बारिश और पलभर में घना कोहरा। गंतव्य तक पहुंचने से पहले कुदरत आपकी परीक्षा ले रही है। बावजूद इसके आपका एक-एक कदम आप में ऊर्जा भरता रहता है।

जरूरी टिप्स

गरम वस्त्रों में खासकर बंदर टोपी जरूर रख लें। अच्छी क्वालिटी की बरसाती या मजबूत छाता भी जरूरी है। हलकी बरसाती या फैंसी छाता नहीं चलेगा, क्योंकि ऊंचाई पर तेज हवा के साथ फुहारें ङोलनी पड़ सकती हैं।

ब्रेड-जैम के अलावा चना-चॉकलेट आपकी खाद्य सामग्री में जरूर शामिल रहें। साथ ही, फर्स्ट-एड बॉक्स और धूपछाया चश्मा भी जरूरी है। ग्लेशियरों पर चमकती धूप नंगी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है।

चाकू, कैंडल, माचिस, सेफ्टी पिन, सूई-धागा जैसी छोटी-छोटी वस्तुओं का साथ ट्रैकिंग में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण होता है। इन्हें साथ ले जाना बिल्कुल न भूलें।

ऐसे स्थानीय पोर्टर की सेवाएं लें, जो आपका गाइड भी हो। कोशिश करें कि आपका यह गाइड आपके रूट पर पड़ने वाले अंतिम रिहायशी गांव का ही कोई बाशिंदा हो।

मुकाम तक पहुंचने के लिए निर्धारित मार्ग ही चुनें। शॉर्ट-कट के चक्कर में भटकाव का जोखिम बढ़ जाता है और मुसीबत गले पड़ सकती है।

यदि ऐन मौके पर किसी आपात मदद की आवश्यकता हो तो हाई-एल्टीट्यूड पर इन दिनों आम तौर पर मौजूद भेड़पालकों पर भरोसा कर सकते हैं।

भारत दर्शन स्पेशल टूर 27 से

आईआरसीटीसी (इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन) के उत्तरी जोन ने भारत दर्शन के लिए विशेष रेल सेवा की घोषणा की है। यह रेल आगामी 27 सितम्बर से दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से प्रस्थान करेगी। 11 रात व 12 दिनों की इस यात्रा में यात्री शिरडी, तिरुपति, कांचिपुरम, रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी और कोचीन जैसी धार्मिक और आध्यात्मिक महत्त्व की जगहों की यात्रा कर पाएंगे। आईआरसीटीसी के उत्तरी जोन के उप महाप्रबंधक (पर्यटन) कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि भारत दर्शन टूर का यह पैकेज इकोनॉमिकल है, ताकि खासकर आम आदमी भी इसका अपेक्षित लाभ उठा पाए। यह विशेष पैकेज 6,156 रुपए का है। इस पैकेज में दोनों तरफ के स्लीपर क्लास के टिकट, धर्मशाला में ठहरने की व्यवस्था, दोनों समय की चाय, नाश्ता और दोनों समय का खाना तथा नॉन एसी बस से विभिन्न जगहों पर घुमाने की सुविधा शामिल है। गाड़ी आगरा, होते हुए तिरुपति, कांचीपुरम, रामेश्वरम, मदुरै, हबीबगंज होते हुए झांसी और वापस दिल्ली आती है।

ये रहे कुछेक खास रूट

रूपकुंड (ऊंचाई 16000 फीट)

जिला- चमोली गढ़वाल, अंतिम मोटरमार्ग- मुंदोली-लोहाजंग, पैदल पथ- 40 किलोमीटर।
विशेषताएं : करीब छह सौ साल पुराने नरकंकालों के अवशेषों को अपने आसपास बिखेरे रहस्यमय झील, ब्रह्मकमलों और दुर्लभ वनस्पतियों का क्षेत्र, अनन्यतम वेदिनी बुग्याल और भव्य हिमशिखरों के दर्शन।

सतोपंथ (ऊंचाई 14,400 फीट)
जिला- चमोली गढ़वाल, अंतिम मोटर मार्ग- बदरीनाथ माणा गांव पैदल पथ- 22 किलोमीटर
विशेषताएं : अलकनंदा नदी का उद्गम स्थल सुंदर त्रिभुजाकार ङील, अनूठा वसुधारा जलप्रपात, स्वर्गारोहिणी हिम शिखरों के
भव्य दर्शन। 
सहस्त्रताल (ऊंचाई 14,000 फुट)
 
जिला- टिहरी गढ़वाल, अंतिम मोटरमार्ग- घुत्तू, पैदल पथ- 34 किलोमीटर
विशेषताएं- हिमशिखरों की गोद में पारदर्शी जल की सुंदर ङील।

डोडी ताल (ऊंचाई 10,000 फीट) 
जिला- उत्तरकाशी, अंतिम मोटरमार्ग- संगम चट्टी, पैदल पथ- 21 किलोमीटर
विशेषताएं- सुंदर सघन जंगल के बीच पसरा षष्ठाकार सरोवर, पर्वत शिखरों का विहंगम दृश्य।

केदार ताल (ऊंचाई 15,000 फीट) 
जिला- उत्तरकाशी, अंतिम मोटरमार्ग- गंगोत्री, पैदल पथ-18 किलोमीटर
विशेषताएं- केदारगंगा का उद्गम और ग्लेशियरों और शिलाओं से घिरा ताल।

देवरिया ताल (ऊंचाई 800 फीट)
जिला- चमोली, अंतिम मोटरमार्ग- ऊखीमठ, पैदल पथ- पांच किलोमीटर
विशेषताएं : अनूठा प्राकृतिक वैभव, एक किलोमीटर की परिधि में फैला सरोवर और उसमें पड़ता हिमशिखरों का प्रतिबिंब।

दियारा बुग्याल (ऊंचाई 11000 फीट)
जिला-उत्तरकाशी, अंतिम मोटरमार्ग-बारसू, पैदल पथ- सात किलोमीटर
विशेषताएं : करीब 10 किलोमीटर में फैली मखमली घास की बेजोड़ ढलानें, स्कीइंग की अनूठी जगह, हिमशिखरों के भव्य दर्शन।

केदार कांठा (13 हजार फीट)
जिला- उत्तरकाशी, अंतिम मोटर मार्ग- जरमौला, पैदल 15 किलोमीटर
विशेषताएं : मीलों तक फैला मखमली घास का मैदान, पर्वत शिखरों के भव्य दर्शन।

खतलिंग ग्लेशियर (ऊंचाई 11,000 फुट)
जिला- टिहरी गढ़वाल, अंतिम मोटर मार्ग- घुत्तू, पैदल पथ- 47 किलोमीटर
विशेषताएं : बर्फ के रहस्यमय रूप से साक्षात्कार, सबसे नजदीकी हिमनद

रुद्रनाथ (ऊंचाई 12 हजार फीट)।
जिला- चमोली गढ़वाल, अंतिम मोटरमार्ग- सगर, पैदल मार्ग- 30 किलोमीटर
विशेषताएं : पंचकेदारों में चतुर्थ तीर्थ, शिव के रौद्र रूप का प्राचीन गुफा मंदिर, अलौकिक हरितिमा।

तुंगनाथ (ऊंचाई 12500 फुट)
जिला- चमोली गढ़वाल, अंतिम मोटरमार्ग- चोपता, पैदल पथ- 3 किलोमीटर
विशेषताएं : पंच केदारों में सबसे ऊंचाई पर स्थित तीर्थ
अलौकिक घाटी, सुंदर बुग्याल, चंद्रशिला से भव्यतम हिमालय दर्शन।

हरकी दून (ऊंचाई 2415 मीटर)
जिला- उत्तरकाशी, अंतिम मोटर मार्ग- सांकरी तालुका, पैदल पथ 23 किलोमीटर
विशेषताएं : फूल और वनस्पति से लकदक मीलों तक पसरा मखमली विस्तार, नदी, झरने, ग्लेशियर, हिमशिखर, अनूठे लोकजीवन के दिग्दर्शन।

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