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होम लोन और वाहन लोन होंगे और महंगे!

होम लोन और वाहन लोन होंगे और महंगे!

भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर महंगाई पर शिकंजा कसते हुए अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दरों में चौथाई से लेकर आधा प्रतिशत तक वृद्धि कर दी। केन्द्रीय बैंक के इस कदम से मकान, दुकान और वाहनों के कर्ज और महंगे हो जायेंगे। हालांकि, जमा पर ब्याज दरें बढ़ने से छोटी जमा करने वाले ग्राहकों को कुछ लाभ मिल सकता है।

रिजर्व बैंक की गुरुवार को जारी मध्य तिमाही समीक्षा में बैंकों साथ अल्पकालीन लेनदेन वाली रेपो दर 0. 25 प्रतिशत बढा़कर 6 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर 0.50 प्रतिशत बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दी गई। ये दरें तुरंत प्रभाव से लागू हो गईं। इन दरों के बढ़ने से बैंकों और रिजर्व बैंक के बीच कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के लिये होने वाले लेनदेन की लागत बढ़ जायेगी।

इस कैलेंडर वर्ष में यह पांचवां मौका है जब रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में वृद्धि की है। जनवरी और मार्च में नकद आरक्षित अनुपात यानी सीआरआर में क्रमश: 0.75 और 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर उसे 6 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया। रेपो और रिवर्स रेपो दर में सबसे पहले मार्च में, फिर अप्रैल में, जुलाई के पहले सप्ताह और फिर 27 जुलाई को तिमाही समीक्षा के दौरान 0.25 से 0.50 प्रतिशत तक वृद्धि की गई। आज जारी मध्य तिमाही समीक्षा में भी इतनी ही वृद्धि कर दी गई।

जनवरी, 2010 से अब तक रेपो दर 1.25 प्रतिशत और रिवर्स रेपो दर में 1.75 प्रतिशत अंक की वृद्धि हो चुकी है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि उसके इस कदम के पीछे मुद्रास्फीति की ऊंची दर ही मुख्य वजह है। थोक मूल्य सूचकांक के ताजा आंकड़ों के अनुसार अगस्त में सकल मुद्रास्फीति 8.51 प्रतिशत रही जबकि चार सितंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 15.10 प्रतिशत पर रही।

बैंकर मानते हैं कि रिजर्व बैंक के ताजा कदम से ब्याज दरों में वृद्धि अवश्यंभावी है। बैंक आफ महाराष्ट्र के अघ्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एलन परेरा ने कहा कि ब्याज दरों में वृद्धि होनी ही है, बैंक दूसरी तिमाही के अंत में इस पर गौर करेंगे। 30 सितंबर तक मुझे किसी बदलाव की उम्मीद नहीं है। निकट भविष्य में दरें बढ़ाने का दबाव रहेगा।

बैंक आफ बड़ौदा के कार्यकारी निदेशक आऱ क़े बक्शी ने भी कुछ इसी स्वर में अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि अक्टूबर के शुरू में ब्याज दरों में बदलाव हो सकता है। कर्ज का उठाव, जमा पूंजी प्रवाह और प्रतिस्पर्धी परिवेश, इन सभी मुददों पर गौर करने के बाद दरों में वृद्धि पर फैसला होगा।

इससे पहले जुलाई में केन्द्रीय बैंक ने जब रेपो और रिवर्स रेपो दर में 0. 25 से लेकर 0. 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की थी तब से लेकर अब तक 40 बैंक जमा पर और 29 बैंक कर्ज पर ब्याज दरें बढ़ा चुके हैं। रिजर्व बैंक भी चाहता है कि जमा पर ब्याज दरें बढ़ें। केन्द्रीय बैंक का कहना है कि ग्राहकों को महंगाई के हिसाब से वास्तविक ब्याज कुछ भी नहीं मिल रहा है।

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