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क्या गलत कहा राहुल गांधी ने?

पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कालाहांडी के जगन्नाथपुर गांव पहुंचकर वहां के आदिवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि वहां विवादास्पद कंपनी की खनन परियोजना का रद्द किया जाना वस्तुत: उनकी जीत है। कालाहांडी का नाम लोग सारी दुनिया में जानते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां वर्षों से गरीब आदिवासी भूख से मरते रहे हैं।
कालाहांडी के अपने महत्वपूर्ण भाषण में राहुल गांधी ने कहा कि देश में दो तरह का भारत है। एक अमीरों का भारत जिसकी आवाज हर जगह पहुंचती है और दूसरा गरीबों का भारत जसकी आवाज शायद ही सुनी जाती है। उन्होंने गरीब आदिवासियों से कहा कि वे उनके सिपाही हैं और उनकी आवाज दिल्ली तक पहुंचाएंगे। जो लोग राहुल गांधी के विचारों के आलोचक हैं उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी ने सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसा भाषण दिया। उनका कहना है कि राज्य के विकास के लिए उड़ीसा के मुख्यमंत्री इस खनन परियोजना की जोरदार सिफारिश कर रहे थे। केवल राजनीतिक कारणों से केन्द्र सरकार ने पर्यावरण का बहाना बनाकर इस परियोजना को मंजूरी नहीं दी। परंतु सच यह है कि भारत में जहां-जहां इस तरह की परियोजनाएं स्थापित हुई हैं उनसे लाभ केवल बड़े उद्योगपतियों को या बहुराष्ट्रीय कंपनियों को हुआ है। गरीब आदिवासियों और गैर-आदिवासियों को जिनकी जमीन सरकार या ये उद्योगपति पानी के भाव खरीदते हैं, उन्हें कभी कोई लाभ नहीं मिला है।
देश के बुद्धिजीवी वर्षों से यह कह रहे हैं कि चाहे देश का जीडीपी बहुत बढ़ गया हो, परंतु आम जनता को उससे कोई लाभ नहीं पहुंचा है। अपना देश दो भागों में बंट गया है ‘इंडिया’ और ‘भारत’। आज भी कर्ज के बोझ से या भूख के कारण गरीब किसान देश के विभिन्न भागों में आत्महत्या कर रहे हैं। ऐसे में यदि राहुल गांधी ने उनकी आवाज उठाई है तो इसका पूरे हृदय से सारे देश में स्वागत होना चाहिए।
राहुल गांधी पिछले कई वर्षों से यह कह रहे हैं कि अपना देश अमीर और गरीब भारत में बंट गया है। 2008-09 के बजट भाषण में भाग लेते हुए उन्होंने कहा था कि अपना देश दो भागों में बंटा है। अमीर और गरीबों में। अमीरों की आवाज ताकतवर आवाज है और सभी उसे सुनते हैं। दूसरी तरफ गरीबों की आवाज कमजोर आवाज है। वह अमीरों की आवाज के सामने दब जाती है। अप्रैल 2009 में उन्होंने कोलकाता में कहा ‘यह देखकर मैं हैरान हो जाता हूं कि अपने देश में कुछ ऐसे लोग हैं जिनके पास इतना धन है जितना संसार में बहुत कम लोगों के पास है और अपने ही देश में एक बहुत बड़ा तबका ऐसा है जिसे दो जून की रोटी भी नहीं मिलती है।’ फिर अक्टूबर, 2009 में उन्होंने रांची में कहा कि भारत दो वर्गो में बंट गया है।
एक वर्ग में ऐसे लोग हैं जो बहुत ही संपन्न हैं और जिनके पास सुविधाओं और
अवसरों की कमी नहीं है और दूसरी तरफ गांव देहात में रहने वाले गरीब लोग हैं जिन्हें न तो कोई सुविधा प्राप्त है और जिनके पास कोई आगे बढ़ने का अवसर भी नहीं है। जुलाई 2010 में उन्होंने छत्तीसगढ़ में कहा कि यह साफ-साफ दिखाई पउ़ रहा है कि भारत दो भागों में बंटा हुआ है। एक भाग में शहरी भारत है जहां कुछ लोग बड़ी तेजी से अमीर बन रहे हैं। दूसरी तरफ गांव देहात का वह भारत है जिसे आम जनता भूल चुकी है। ऐसे भारत में आदिवासी, दलित और गरीब रह रहे हैं। यह स्थिति निश्चय ही चिंताजनक है।
स्वर्गीय राजीव गांधी ने भी कांग्रेस शताब्दी के अवसर पर मुंबई में कहा था कि कांग्रेस को सत्ता के दलालों से मुक्त कराना है। परंतु वे अपने मिशन में कामयाब नहीं हो सके और सत्ता के दलालों ने उन्हें इतने विवादों में उलझा दिया कि वे आजीवन परेशान रहे। जो लोग उनके जीवनकाल में उनकी कटु आलोचना करते थे वे ही उनकी हत्या के बाद उनकी तारीफ करने लगे। राजीव गांधी ने कई बार कहा था कि विकास का पैसा गांव देहात के जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता है। एक रुपए का 15 पैसा ही उन तक पहुंचता है। बाकी पैसा बिचौलिए मार जाते हैं। स्थिति आज उससे भी बदतर हो गई है और आज तो एक रुपए का 10 पैसा ही उन तक पहुंचता है। बाकी पैसा बिचौलिए मार ले जाते हैं। स्थिति अत्यंत ही चिंताजनक है। इसलिए राहुल गांधी ने आदिवासियों, दलितों और गरीबों के पक्ष में जो आह्वान शुरू किया है उसका समाज के सभी वर्गो द्वारा स्वागत होना चाहिए।

लेखक पूर्व सांसद और पूर्व राजदूत हैं

 

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