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यमुना में न लगती ठोकर तो मचती भारी तबाही

यमुना नदी में ठोकर नहीं लगाई जाती तो इस बार भारी तबाही मच जाती। लेकिन साढ़े चार करोड़ की लागत से यमुना में लगाई गई ठोकरों ने फरीदाबाद व पलवल को बाढ़ से तबाही से बचा दिया। इनके लगने से यमुना तीरे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा टल गया। जबकि गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष यमुना में पानी दोगुना  से अधिक छोड़ा गया। इसके बाद भी बाढ़ का कोई खतरा न रहे। इसे लेकर यमुना का फिर से सर्वे कराया जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ के बाद सर्वे कराकर यमुना में ठोकरें लगाई जाएंगी।


अप्रैल के महीने में भीषण गर्मी को देख मौसम विभाग ने इस बार भारी बारिश होने का अनुमान लगाया था। बाढ़ की आशंका को देख सिंचाई विभाग पहले ही चेत गया। विभाग ने यमुना नदी के किनारे उन सभी स्थानों पर ठोकरें बनाने का निर्णय लिया था, जहां गत वर्ष नदी में आई बाढ़ के दौरान कटाव से भारी तबाही मची थी। इसके तहत पलवल क्षेत्र के गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए कई स्थानों पर ठोकरें लगाई गई थीं।
मौसम विभाग के ज्यादा बारिश होने की उम्मीद के साथ ही सिंचाई विभाग हरकत में आ गया। विभाग ने यमुना नदी के किनारे ऐसे कई स्थान चिन्हित कर 30 मई से पहले ठोकर बनाने का फैंसला लिया गया। फरीदाबाद में अमीपुर व लालपुर से लेकर मोहना तक 20 से अधिक ठोकरें बनाई गई। इनके निर्माण पर तीन करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई। गत वर्ष इन गांवों में बाढ़ के चलते कटाव हो गया था। इससे काफी संख्या में फसल पानी में डूब गई थी। हालांकि इस बार पहले की तुलना में ओखला बैराज से दो गुना अधिक पानी छोड़ा गया। बावजूद इसके इलाका तबाह होने से बच गया।

ठोकरों से इन गांवों को हुआ फायदा
-अमीपुर
-लालपुर
-टिकावली
-शाहपुर
-दूल्हेपुर समेत एक दजर्न गांव

फरीदाबाद सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता आनंद कुमार: बाढ़ के बाद इस बार भी यमुना का सर्वे कराया जाएगा। जहां कटाव होने की आशंका है, वहां पर ठोकरें बनाई जानी है। उनका मानना है कि इससे पहले 30 मई तक विभाग की ओर से यमुना में साढ़े चार करोड़ की लागत से ठोकरें बनाई गई। इसके चलते फरीदाबाद व पलवल में को ई जान-माल की हानि नहीं हुई।
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अतवा व गुरवाड़ी में यमुना के किनारे बनाई गई थीं ठोकरें
अब से पहले यमुना नदी में बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा तबाही पलवल जिले में मचती थी। गत वर्षो में भी इस जिले के दो गांव मोहबलीपुर और इंदिरा नगर पानी से घिरे थे। यमुना तीरे के गांव अतवा में यमुना नदी का पानी घरों तक पहुंचा गया था। लेकिन इस बार पहले से दो गुना अधिक पानी होने के बावजूद किसी प्रकार का को ई खतरा पैदा नहीं हुआ।  पलवल सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता आरके सिंगला ने बताया कि इस वर्ष यमुना में ठोकर बनाने पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए। यही कारण है कि इस बार पलवल जिला सुरक्षित रहा।

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