DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फ्रैंडशिप पीक, ट्रैकिंग भी पर्वतारोहण भी

फ्रैंडशिप पीक, ट्रैकिंग भी पर्वतारोहण भी

आज हम तुम्हें फ्रैंडशिप पीक के विषय में बताते हैं। बर्फ से ढकी यह पर्वत चोटी हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनाली के समीप है। तुम्हें याद है ना, बहुत सारे पहाड़ जब एक कतार में हों तो उस कतार को पर्वत श्रृंखला कहते हैं। फ्रैंडशिप पीक जिस पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, उसे पीरपंजाल श्रृंखला कहते हैं। इस पीक के अभियान के लिए मनाली से 18 कि.मी. दूर सोलांग वैली में पहुंचना होता है। यह एक सुंदर घाटी है, जहां गर्मियों में रोज सैकड़ों सैलानी आते हैं। उस समय यहां बर्फ नहीं होती। लेकिन सर्दियों में सोलांग वैली में बर्फ की चादर फैली होती है। उस समय यह घाटी स्कीइंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट का केन्द्र बन जाती है। फ्रैंडशिप  पीक के अभियान पर जाने वाले जब यहां पहुंचते हैं तो उन्हें सोलांग घाटी से दिखाई देते बर्फ के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बहुत मनमोहक लगते हैं। अभियान की शुरुआत में पहले सोलांग से बक्करथाच के लिए प्रस्थान करते हैं। यहां से पैदल मार्ग शुरू हो जाता है। उस मार्ग में हरी-भरी घाटी और घने जंगल देखने को मिलते हैं। आगे बढ़ते हुए पर्वतारोही हदसर होकर तीसरे दिन बैस कैम्प तक पहुंचते हैं। बैस कैम्प अर्थात् आधार शिविर वह स्थान होता है, जहां से वास्तव में पर्वतारोहण आरम्भ होता है। मौसम के अनुकूल स्वयं को ढालने के लिए दो-तीन दिन बैस कैम्प में रुकना होता है। इन दो-तीन दिन में साहसी लोग खाली थोड़ा ही बैठते हैं। बेस कैम्प के क्षेत्र में वे बर्फ में चढ़ने-उतरने की प्रेक्टिस, आइस एक्स का प्रयोग और रस्से के सहारे आगे बढ़ने का अभ्यास करते रहते हैं। उसके बाद पूरा समूह एडवांस बेस कैम्प तक पहुंचता है। जानते हो, एडवांस बेस कैम्प का मार्ग आसान नहीं होता, बल्कि इस मार्ग की चढ़ाई पहले से कुछ कठिन होती है। वहां एक या दो दिन विश्रम के बाद जब फ्रैंडशिप पीक पर चढ़ने का प्रयास शुरू करते हैं तो सभी में बेहद उत्साह होता है। और क्यों न हो, आखिर अपने अभियान के महत्त्वपूर्ण चरण अर्थात फ्रैंडशिप हिमशिखर को फतह करने जा रहे हैं। यह एक टीम एडवेंचर होता है, इसलिए पर्वतारोही एक दूसरे का साथ देते हुए बर्फ पर चढ़ते जाते हैं। इस दौरान हमेशा समूह के साथ निर्धारित मार्ग पर ही चढ़ना चाहिए।

यह पीक 5289 मीटर ऊंची है। इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के लिए बर्फीली हवाओं का सामना करना होता है। जब पर्वतारोही शिखर पर कदम रखते हैं तो उनके रोमांच का ठिकाना नहीं रहता। वहां से चारों बर्फ से ढके पर्वत नजर आते है। यह एक अद्वितीय अनुभव होता है। वापसी यात्रा में सभी के चहरे पर प्रसन्नता के साथ विजयी होने के भाव दिखाई देते हैं।

फैक्ट फाइल

फैंड्रशिप पीक का अभियान ट्रेकिंग-कम-माउंटेनियरिंग अभियान है।
ऐसे अभियान के लिए पूरी तैयारी के साथ प्रस्थान करना चाहिए।
इसके लिए पर्वतारोहण के प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन पीक पर चढ़ने का प्रयास किसी अनुभवी पर्वतारोही के मार्गदर्शन में करना चाहिए।
किसी एडवेंचर क्लब या मनाली में स्थित किसी एडवेंचर टूर ऑपरेटर से अभियान की व्यवस्था के लिए संपर्क कर सकते हैं।
अभियान पूर्ण होने के बाद मनाली एवं कुल्लू की सैर भी की जा सकती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:फ्रैंडशिप पीक, ट्रैकिंग भी पर्वतारोहण भी