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सर्वदलीय बैठकः तय होगी कश्मीर में बातचीत की प्रक्रिया

सर्वदलीय बैठकः तय होगी कश्मीर में बातचीत की प्रक्रिया

जम्मू-कश्मीर में हुर्रियत सहित सभी संगठनों और समूहों से बातचीत को शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए सरकार ने मंगलवार को संकेत दिया कि बुधवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक में राजनीतिक दल तय करेंगे कि राज्य में बातचीत की प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाना है। इस बैठक के बाद एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल के राज्य के हालात का जायजा लेने कश्मीर जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि कल की सर्वदलीय बैठक में वे सभी राजनीतिक दल शामिल होंगे जिनका संसद में प्रतिनिधित्व है। कश्मीर मसले पर व्यापक बातचीत के बाद संभवत: एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल हालात का जायजा लेने के लिए राज्य के दौरे पर जाएगा और इस प्रतिनिधिमंडल की रपट आने के बाद सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक होगी। इसके पहले सीसीएस की बैठक कल सर्वदलीय बैठक के बाद ही होने की उम्मीद की जा रही थी।

सूत्रों ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में उन सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिनका संसद में प्रतिनिधित्व है। इस सवाल पर कि क्या क्षेत्रीय पार्टियों को भी सर्वदलीय बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है, उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय पार्टियों को नहीं बुलाया गया है लेकिन जिन क्षेत्रीय दलों का संसद में प्रतिनिधित्व है, वे बैठक में शामिल होंगे।

यह पूछने पर कि क्या सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि कश्मीर जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल होगा तो सूत्रों ने कहा कि यह फैसला कल सर्वदलीय बैठक को करना है। यदि केन्द्रीय गृह मंत्रालय के किसी प्रतिनिधि को शामिल करने की बात होती है तो उसे अवश्य टीम का सदस्य बनाया जाएगा।

इस सवाल पर कि क्या पीडीपी सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित होगी, सूत्रों ने कहा कि उसे संभवत: बुलाया जा रहा है। कुल मिलाकर हम इस मसले पर बातचीत चाहते हैं और उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सूत्रों ने कहा कि हमारी प्राथमिकता वार्ता है। जब तक वार्ता नहीं होगी, तब तक किसी परस्पर सहमति वाले समझौते पर नहीं पहुंचा जा सकता।

यह पूछे जाने पर कि क्या हुर्रियत को वार्ता प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा तो उन्होंने कहा कि जो भी वार्ता के लिए आगे आएगा, उसके साथ बातचीत की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, कश्मीर मसले पर इस बार कोई घोषणा नहीं होगी, बल्कि बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर ही कोई घोषणा की जाएगी।

सर्वदलीय बैठक और सीसीएस में सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (एएफएसपीए) में संशोधन और इसे राज्य के कुछ हिस्सों से हटाने पर चर्चा की संभावना के बारे में पूछने पर सूत्रों ने कहा कि एएफएसपीए ही एकमात्र मसला नहीं है। इसके अलावा और भी मुद्दे हैं। जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी मुद्दों पर समग्रता से चर्चा की जाएगी।
 
एएफएसपीए के मुद्दे पर सरकार में कथित मतभेद की खबरों पर सूत्रों ने कहा कि इस बारे में सरकार में आम सहमति है और किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने कहा कि एएफएसपीए को लेकर मीडिया सहित विभिन्न वर्गों में कई तरह की गलतफहमियां हैं लेकिन इस बारे में गृह मंत्रालय का प्रस्ताव एकदम स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि शिकायत निपटान तंत्र भी गृह मंत्रालय के प्रस्ताव का हिस्सा है।

जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक चूक और विश्वास की कमी को लेकर कल सीसीएस के बाद जारी बयान के बारे में पूछने पर सूत्रों ने इसके लिए केन्द्र और राज्य दोनों ही सरकारों को जिम्मेदार मानते हुए कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता राज्य के सभी वगो और संगठनों के साथ बातचीत करना है अन्यथा समस्याओं का समाधान नहीं होगा। केवल घोषणाओं से समस्याओं का हल नहीं निकल सकता।
 
उन्होंने कहा कि सरकार कश्मीर मसले पर आम सहमति बनाने की कोशिश करेगी। वार्ता प्रक्रिया में केन्द्र, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और कश्मीर में वार्ता के इच्छुक सभी वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। यह पूछने पर कि क्या राज्य के लिए कोई पैकेज घोषित किया जा सकता है तो सूत्रों ने कहा कि किसी आर्थिक पैकेज की घोषणा की संभावना नहीं है लेकिन राजनीति पैकेज अवश्य घोषित किया जा सकता है, जिसके तहत वार्ता को तरजीह दी जाएगी।

कल होने वाली बैठक में कांग्रेस, मुख्य विपक्षी दल भाजपा, वाम दल, राजद, सपा, बसपा, मुस्लिम लीग, तृणमूल, नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, राकांपा, लोजपा, तेदेपा, अन्नाद्रमुक, द्रमुक, रालोद, जद एस, जद (यू) सहित उन दलों के नेताओं के भाग लेने की उम्मीद है, जिनका संसद में प्रतिनिधित्व है।

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