DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

हमेशा भरोसे लायक नहीं होती संदिग्धों की शिनाख्त

वैज्ञानिकों ने कहा है कि आपराधिक मामलों में संदिग्ध की प्रत्यक्षदर्शी द्वारा की गई शिनाख्त हमेशा भरोसे लायक नहीं होती है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे प्रत्यक्षदर्शी कतार में से संदिग्धों को इसलिए चुन लेते हैं क्योंकि वे खुद को उनसे असंबद्ध पाते हैं या उनके हाव भाव से खार खाने के कारण शिनाख्त में उनकी ओर उंगली उठा देते हैं। इसलिए गच्चा खा जाने का अंदेशा होता है।

मनोवैज्ञानिकों ने शिनाख्त के समय प्रत्यक्षदर्शियों के दिमाग में क्या चल रहा होता है इस संबंध में अनुसंधान किया। उन्होंने इस बात की पड़ताल की कि वे शिनाख्त के समय किस प्रकार पसंद नापसंद के आधार पर अपना फैसला करते हैं।
    
पोटर्समाउथ विश्वविद्यालय में याद्दाश्त के विशेषज्ञ डा हार्टमर्ट ब्लैंक ने कहा कि ऐसे निर्णय स्फूर्त होते हैं और पहले से विचार करके नहीं। इस अध्ययन के मुख्य वैज्ञानिक डा ब्लैंक के हवाले से डेली मेल ने खबर दी है, पसंद नापसंद की भावना निश्चित तौर पर निर्णय को प्रभावित करती है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:हमेशा भरोसे लायक नहीं होती संदिग्धों की शिनाख्त