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खाद्य वस्तुओं की महंगाई चिंता का विषय: प्रणव

वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने खाद्य पदार्थों में पिछले कुछ महीनों से जारी महंगाई के दबाव को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि जरुरत पड़ने पर रिजर्व बैंक और उनका मंत्रालय उचित कदम उठायेगें।

मुखर्जी ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा कि मुद्रास्फीतिक दबाव अभी कायम है, क्योंकि खाद्य वस्तुओं की कीमतों मानसून के बिखराव तथा अन्य वजह से ऊपर जा रही हैं।

सरकार द्वारा आज 2004-05 के मूल्यों पर आधारित थोक मूल्य सूचकांक की नई श्रंखला के आंकड़ों के अनुसार कि अगस्त माह में मुद्रास्फीति 8. 51 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक लगातार स्थिति पर निगाह रखे हुये है। हम लगातार रिजर्व बैंक के संपर्क में हैं। केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय उचित समय पर उचित कदम उठाएगा।

पुरानी श्रंखला के अनुसार अगस्त माह में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 9. 5 प्रतिशत रही है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि सालाना मुद्रास्फीति इससे काफी नीचे होगी। नई श्रंखला में सालाना दर के आधार पर यह 8. 5 प्रतिशत से काफी नीचे होगी।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल दर साल आधार पर खाद्य वस्तुओं के दाम अगस्त में 14. 64 प्रतिशत बढ़े, वहीं गैर खाद्य वस्तुओं मसलन धागे और तिलहन आदि की कीमतों में 16.04 फीसद की वृद्धि हुई। खनिज पदार्थों के दाम इस दौरान 23.82 प्रतिशत बढ़े।

1993-94 के मूल्यों पर आधारित पुराने सूचकांक के अनुसार, जून माह तक मुद्रास्फीति लगातार दो अंक में बनी रही। जुलाई में यह घटकर 9.97 प्रतिशत पर आ गई।

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